भारतीय भाषा परिवार पर सम्मेलन आयोजित किया गया

Jan 22, 2026 - 22:52
Jan 22, 2026 - 22:56
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भारतीय भाषा परिवार पर सम्मेलन आयोजित किया गया
भारतीय भाषा परिवार की पुस्तकों को लोकार्पित करते प्रो एस पी एम त्रिपाठी , प्रो रजनीश अरोड़ा , प्रो अवधेश कुमार , प्रो कीर्ति पांडेय , प्रो अजय शुक्ला, डॉ मनीष पांडेय

भाषा सामाजिक एकता की आधारशिला है, विभाजन का माध्यम नहीं : प्रो. एस.पी.एम. त्रिपाठी

गोरखपुर।

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय द्वारा “भारतीय भाषा परिवारः भारत की भाषाओं की भाषाई अखंडता पर विचार-विमर्श — अतीत और भविष्य” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है जिसका उद्घाटन सत्र गुरुवार, 22 जनवरी को संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी, मुख्य वक्ता प्रो. राजनीश अरोड़ा तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. अवधेश कुमार रहे। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्वानों, भाषाविदों एवं समाजचिंतकों की गरिमामयी उपस्थिति ने संगोष्ठी को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ने भाषा के आधार पर प्राकृतिक वर्गीकरण और विभाजन को स्वाभाविक मानने की प्रवृत्ति पर गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति की पहचान, सामूहिक स्मृति और अपनेपन की भावना से गहराई से जुड़ी होती है। भाषा के नाम पर समाज को खंडित करने की प्रवृत्तियाँ सामाजिक समरसता के लिए घातक हैं, जबकि भारतीय भाषिक परंपरा मूलतः समन्वय और सहअस्तित्व की पक्षधर रही है।

मुख्य वक्ता इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस यूनिवर्सिटी लखनऊ के प्रो. राजनीश अरोड़ा ने अपने व्याख्यान में द्विभाषी एवं बहुभाषी शिक्षण पद्धति की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने बहुभाषिकता के संज्ञानात्मक और मनोवैज्ञानिक लाभों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि यह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को समृद्ध करती है। उन्होंने पाणिनि, भरतृहरि और भरतमुनि जैसे भारतीय भाषिक चिंतकों का विशेष उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालयों में ध्वनिविज्ञान पढ़ाते समय पाणिनि की उपेक्षा पर खेद व्यक्त किया। साथ ही, रामचरितमानस के उदाहरणों के माध्यम से उसमें निहित उत्तर-संरचनावादी तत्वों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र के हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं साहित्य विद्यापीठ के डीन प्रो. अवधेश कुमार ने अपने संबोधन में भारत और उसके नागरिकों से संघर्ष और टकराव की मानसिकता से ऊपर उठकर “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के साथ वैश्विक परिवार की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘संकल्प से सिद्धि’ के विचार का उल्लेख करते हुए स्वधर्म की अवधारणा को सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक चेतना से जोड़कर प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी के प्रारंभ में राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भावनात्मक स्तर पर सभी भाषाएँ राष्ट्रीय हैं और संवैधानिक रूप से समान अधिकार रखती हैं। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक के “विकसित भारत” के संकल्प के संदर्भ में भारतीय भाषाओं की निर्णायक भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी सभ्यता की सांस्कृतिक स्मृति, सामाजिक चेतना और बौद्धिक परंपरा की आत्मा होती है। 

कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग के डॉ . मनीष पांडेय ने किया।

भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का हुआ विमोचन

राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान भारतीय भाषाओं के अध्ययन एवं संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रकाशित भारतीय भाषा परिवार विषयक दो पुस्तकों का औपचारिक विमोचन किया गया। यह विमोचन कार्यक्रम संगोष्ठी के एक विशेष सत्र में गणमान्य अतिथियों एवं विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। विमोचित पुस्तकों में- "इंसाइट्स फ्रॉम भारतीय भाषा परिवार: ए न्यू फ़्रेमवर्क इन लिंग्विस्टिक्स,इंसाइट्स फ्रॉम कलेक्टेड स्टडीज़ ऑन भारतीय भाषा परिवार: पर्सपेक्टिव्स एंड होराइज़न्स शामिल हैं। ये दोनों कृतियाँ भारतीय भाषाओं की भाषावैज्ञानिक संरचना, उनके पारिवारिक अंतर्संबंधों तथा समकालीन अकादमिक विमर्श पर केंद्रित हैं।

भारतीय भाषा परिवार की पुस्तकों पर पैनल डिस्कशन का भी हुआ आयोजन

भारतीय भाषा परिवार पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिन भारतीय भाषा परिवार विषय पर प्रकाशित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों—इनसाइड्स फ्रॉम इंडियन लैंग्वेज फैमिली: ए न्यू फ्रेमवर्क इन लिंग्विस्टिक्स तथा इनसाइट्स फ्रॉम कलेक्टिव स्टडीज़ ऑन भारतीय भाषा परिवार पर पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया. 

इस सत्र में प्रो. रजनीश अरोड़ा, प्रो. अवधेश कुमार, उर्दू विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रज़ी उर रहमान, इलाहाबाद विश्वविद्यालयके अंग्रेजी विभाग के प्रो. वी. के. रॉय, लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. जयशंकर पांडेय, इफ्लू, लखनऊ कैंपस से डॉ मनीष कुमार गौरव, प्रो. शरद कुमार मिश्रा (बायोटेक्नोलॉजी विभाग) तथा प्रो. सुनीता मुर्मू (अंग्रेजी विभाग) ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग के डॉ. अमोद कुमार राय द्वारा किया गया।

चार तकनीकी सत्रों में 70 से अधिक शोध पत्रों का हुआ वाचन

सम्मेलन के प्रथम दिवस चार तकनीकी सत्रों का सफल आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने कुल 70 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए। तकनीकी सत्र–1 की अध्यक्षता प्रो. राकेश तिवारी (भौतिक विज्ञान) एवं प्रो. गौरहरि बेहेरा (अंग्रेज़ी) ने की, जिसमें भारतीय भाषाओं, लोक परंपराओं, भाषाई अस्मिता, औपनिवेशिक विमर्श और नई शिक्षा नीति पर 20 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। तकनीकी सत्र–2 की अध्यक्षता प्रो. शिखा सिंह (अंग्रेज़ी) और डॉ. रागिनी कपूर (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने की, जिसमें डिजिटल युग में भारतीय भाषाएं, मीडिया, अनुवाद, ज्ञान परंपराएं और भाषाई विमर्श पर 20 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। तकनीकी सत्र–3 की अध्यक्षता प्रो. नंदिता सिंह (अंग्रेज़ी) ने की, जिसमें बहुभाषिकता, लोक रंगमंच, स्त्री विमर्श, अनुवाद, डिजिटल माध्यम और भाषाई अखंडता पर 17 शोधपत्र प्रस्तुत हुए। तकनीकी सत्र–4 की अध्यक्षता डॉ. अमोद कुमार राय (अंग्रेज़ी), डॉ. साजिद अंसारी (उर्दू), डॉ. कुलदीपक शुक्ला (संस्कृत) और डॉ. अखिल मिश्रा (हिंदी) ने की, जिसमें हिंदी, उर्दू और संस्कृत में नई शिक्षा नीति, मीडिया, सिनेमा, डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ और बहुभाषी शिक्षा पर 11 शोधपत्र प्रस्तुत हुए। सभी सत्रों में भाषाई अखंडता, भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल माध्यम और बहुभाषिक शिक्षा जैसे विषयों पर गंभीर और सार्थक अकादमिक विमर्श हुआ।

संयोजक प्रो अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि समापन 23 जनवरी को अपराह्न 2.30 बजे से होगा जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो पूनम टंडन करेंगी।

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