पत्रकारिता तभी सुरक्षित , पत्रकार जब निर्भय होकर कार्य करें- प्रो.राजेश
लखनऊ :हिन्द भास्कर ।
हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग द्वारा "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मीडिया की स्थिति: भविष्य और चुनौतियां" विषय पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा, बल्कि विद्यार्थियों में समसामयिक मीडिया मुद्दों के प्रति गहरी समझ विकसित करने का एक प्रभावी मंच भी सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम में बी.ए. जे.एम.सी. के 1, 3 और 5 सेमेस्टर तथा एम.ए. जे.एम.सी.-1 के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। परिचर्चा की शुरुआत में विभाग के वरिष्ठ शिक्षक और कोऑर्डिनेटर प्रो. राजेश मल्ल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारतीय मीडिया की वर्तमान वैश्विक छवि और उसे प्रभावित करने वाली चुनौतियों पर अत्यंत गंभीर, तथ्यात्मक और प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मीडिया परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और इस परिवर्तन को समझना तथा उसके अनुरूप पत्रकारिता के नैतिक और पेशेवर मानकों को बनाए रखना आज के विद्यार्थियों की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
प्रो. मल्ल ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से फेक न्यूज़ के बढ़ते प्रसार, मीडिया में तथ्य-जांच (Fact-checking) की आवश्यकता, और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनियंत्रित सामग्री के कारण पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर पड़ रहे प्रभाव पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि फेक न्यूज़ केवल सूचना को भ्रामक नहीं बनाती, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, जनविश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि एक पत्रकार का पहला धर्म सत्य, पारदर्शिता और निष्पक्षता है।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा (Journalist Safety) पर भी गंभीर विमर्श हुआ। विद्यार्थियों ने युद्ध क्षेत्रों, राजनीतिक संघर्षों, अपराध रिपोर्टिंग और संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर कार्यरत पत्रकारों को होने वाले जोखिमों पर विचार व्यक्त किए। प्रो. मल्ल ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों तथा भारत में पत्रकारों पर होने वाले हमलों के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारिता तभी सुरक्षित और फलदायी हो सकती है जब पत्रकार निर्भय होकर कार्य कर सकें।
इसके अलावा विद्यार्थियों ने मीडिया नीतियों (Media Policies) और पत्रकारिता से संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भी विचार-विमर्श किया। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देश, डिजिटल मीडिया नीति, प्रेस स्वतंत्रता, संपादकीय जिम्मेदारी, मीडिया पारदर्शिता एवं नैतिकता जैसे विषयों पर सार्थक तर्क प्रस्तुत किए गए। कई विद्यार्थियों का मत था कि डिजिटल मीडिया के लिए ठोस नियामक ढांचे और पारदर्शिता की अनिवार्यता से मीडिया की विश्वसनीयता और जवाबदेही को सुदृढ़ किया जा सकता है।
विद्यार्थियों की सहभागिता
इस परिचर्चा में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विषय से संबंधित अपने विचारों, प्रश्नों तथा विश्लेषणों द्वारा चर्चा को अत्यंत समृद्ध बनाया। कार्यक्रम में विशेष रूप से नंदिनी मिश्रा, कुमार सुधांशु सिंह, मृगांका यादव, मान्सी मिश्रा, पूर्णिमा त्रिपाठी, आतिश कुमार, नेहा यादव, मान्सी दुबे, दीपांश त्रिपाठी, मयंक नाथ त्रिपाठी, प्रिंस सिंह, साक्षी सिंगज और योगेश्वर दुबे ने उल्लेखनीय सहभागिता दर्ज की। इन सभी विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया परिदृश्य, डिजिटल पत्रकारिता, फेक न्यूज़, मीडिया नैतिकता, प्रेस स्वतंत्रता तथा पत्रकार सुरक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर अपने सूझबूझपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
विद्यार्थियों के विचार
परिचर्चा के दौरान कई विद्यार्थियों ने मीडिया की स्थिति और भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ रखीं।
नंदिनी मिश्रा (MAJMC-1) ने मीडिया की गिरती वैश्विक रैंकिंग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “यदि मीडिया की स्थिति और शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी रैंकिंग और भी अधिक गिर सकती है।”
कुमार सुधांशु सिंह (BAJMC-5) ने डिजिटल मीडिया की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “आज डिजिटल मीडिया पर लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पत्रकारिता की दिशा और गति दोनों को निर्धारित करेंगे।”
मान्सी मिश्रा (BAJMC-1) ने मीडिया की निष्पक्षता को आवश्यक बताते हुए कहा कि “यदि पत्रकारिता को अपनी विश्वसनीय छवि बनाए रखनी है तो खबरों में निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता बनाए रखना अनिवार्य है।”
दीपांश त्रिपाठी (BAJMC-3) ने फेक न्यूज़ को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि “यदि फेक न्यूज़ के प्रसार पर रोक नहीं लगी, तो निकट भविष्य में लोगों का विश्वास मीडिया से पूरी तरह उठ सकता है।”
इन सभी विचारों ने चर्चा की गंभीरता को और गहराई प्रदान की तथा विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, सामाजिक संवेदना और पत्रकारिता के प्रति सजग दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
कार्यक्रम का प्रश्नोत्तर सत्र विशेष रूप से रोचक और ज्ञानवर्धक रहा। विद्यार्थियों ने प्रासंगिक प्रश्न पूछे और प्रो. मल्ल से उनके विस्तृत समाधान प्राप्त किए। इस रचनात्मक संवाद ने उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता को सुदृढ़ किया और भारतीय मीडिया की अंतरराष्ट्रीय स्थिति, वैश्विक प्रभाव तथा भविष्य की चुनौतियों पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया।
समग्र रूप से, यह परिचर्चा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। इससे उनकी पत्रकारिता संबंधी समझ व्यापक हुई, चिंतनशील दृष्टि विकसित हुई और मीडिया के सामाजिक दायित्वों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ी। विभाग भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षिक एवं संवादात्मक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक, समसामयिक और शोधपरक अनुभव प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध रहेगा।
What's Your Reaction?
