भाषा साहित्य संस्कृति और कला के संरक्षण और संवर्धन हेतु गूगल से जुड़ना जरूरी
बाराबंकी।
अवध भारती संस्थान और भारतीय भाषा संस्थान मैसूर कर्नाटक के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित पाँच दिवसीय राष्ट्रीय अवधी कार्यशाला के चौथे दिवस बाराबंकी स्थित श्री गंगा मेमोरियल गर्ल्स पी जी कॉलेज पैसार में एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि नीरज शुक्ला मुख्य कुलानुशासक के एम सी भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ ने कहा कि अवधी भाषा साहित्य संस्कृति और कला के संरक्षण तथा संवर्धन हेतु गूगल से जुड़ना जरूरी है। उन्होंने भारतीय भाषा संस्थान मैसूर तथा अवध भारती संस्थान द्वारा अवधी को गूगल की भाषा बनाए जाने हेतु किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ये भी कहा कि के एम सी विश्वविद्यालय अवधी को विषय के रूप में पढ़ाने वाला भारत का पहला विश्विद्यालय बन गया है।
मुख्य वक्ता डॉ सत्येन्द्र कुमार अवस्थी समन्वयक भारतीय भाषा संस्थान मैसूर कर्नाटक ने अपने सम्बोधन में कहा अवधी उत्तर भारत की प्रमुख भाषाओं में है अवधी भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला अवध की पहचान है। अवधी गूगल की भाषा बने ये हम लोगों का प्रयास है। अध्यक्षता करते हुए मुख्य संयोजक डॉ रामबहादुर मिश्रा अध्यक्ष अवध भारती संस्थान उत्तर प्रदेश ने कहा कि अवधी को बचाना है तो सबको अवधी बोलना, अवधी पढ़ना, अवधी लिखना चाहिए। भाषा का संवर्धन और संरक्षण लेखन और बोलने से होता है। उन्होंने अपने द्वारा अड़तीस साल पूर्व शुरू किए गए अवधी अभियान पर गर्व व्यक्त किया और भारतीय भाषा संस्थान के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। श्री मिश्र ने के एम सी भाषा विश्वविद्यालय में इसी सत्र जुलाई से अवधी को विषय के रूप में पढ़ाये जाने वाले स्नातक पाठ्यक्रम में लोगों से प्रवेश लेने की अपील की।
उक्त कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी सेवानिवृत्त प्रवक्ता सन्त तुलसी दास पी जी कॉलेज सुल्तानपुर, डॉ दिनेश कुमार सिंह, शैक्षिक समन्वयक वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय, डॉ विनय दास ने भी विचार व्यक्त किए। स्वागत डॉ विनय दास ने तथा संचालन प्रदीप सारंग ने किया। आँखें फाउण्डेशन की ओर से सुनील वर्मा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में सदानन्द वर्मा, रमेश चन्द्र रावत, राम किशुन यादव, एड रजत बहादुर वर्मा, देवेन्द्र वर्मा, डॉ कुमार पुष्पेन्द्र आदि ने सक्रिय सहभागिता की।
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