पीक पावर सप्लाई में नंबर-1 बना उत्तर प्रदेश, ऊर्जा क्षेत्र में रचा नया इतिहास

May 9, 2026 - 22:24
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पीक पावर सप्लाई में नंबर-1 बना उत्तर प्रदेश, ऊर्जा क्षेत्र में रचा नया इतिहास

ओबरा-D, अनपरा-E, मेजा और मिर्जापुर परियोजनाओं के माध्यम से 10,600 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जा रही है।

ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास से मजबूत हुआ ‘पावरफुल यूपी’

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने शनिवार को कहा कि जो क्षेत्र कभी उत्तर प्रदेश की कमजोरी माना जाता था, वही आज उसकी सबसे बड़ी ताकत बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा से समृद्ध देश का ऊर्जा हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में उत्तर प्रदेश की तापीय विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है। वर्ष 2017 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति बिजली खपत 489 यूनिट थी, जो 2022 में बढ़कर 518 यूनिट हुई और अब 630 यूनिट तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में पीक डिमांड बिजली आपूर्ति में नंबर-1 राज्य है तथा RDSS एवं ग्रीन कॉरिडोर जैसी केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में PLF ऐतिहासिक स्तर 85 प्रतिशत तक पहुँच गया है तथा रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति के बावजूद AT&C लॉसेज़ में कमी आई है।

श्री शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग झूठ को बार-बार दोहराकर उसे सच साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में उनका मुख्य लक्ष्य सभी उपभोक्ताओं को 24×7 निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना तथा प्रति व्यक्ति बिजली खपत के मामले में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय औसत तक पहुँचाना है।ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश की ऊर्जा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के 70 वर्षों तथा समाजवादी पार्टी के चार कार्यकालों के दौरान वर्ष 2012-17 में प्रदेश की औसत पीक डिमांड मात्र 13,000 मेगावाट थी, जबकि पिछले चार वर्षों में यह औसत बढ़कर 30,000 मेगावाट तक पहुँच गया, जो लगभग ढाई गुना अधिक है। पिछले वर्ष प्रदेश की वास्तविक पीक डिमांड 31,468 मेगावाट रही तथा इस वर्ष भी अप्रैल माह में बारिश के बावजूद 28 अप्रैल को 29,475 मेगावाट की पीक डिमांड की सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई।

उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से उत्तर प्रदेश देश में पीक बिजली आपूर्ति में नंबर-1 रहा है। वर्ष 2017 तक प्रदेश में कुल 1.80 करोड़ बिजली उपभोक्ता थे, जो अब बढ़कर 3.70 करोड़ हो चुके हैं। केवल पिछले चार वर्षों में लगभग 50 लाख नए बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। अब 2017 की तुलना में दोगुने से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।श्री शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 तक केवल 1.20 लाख मजरों का विद्युतीकरण हुआ था, जबकि पिछले छह वर्षों में 1.75 लाख अतिरिक्त मजरों को बिजली से जोड़ा गया है। वर्ष 2017 तक प्रदेश की अधिकतम तापीय उत्पादन क्षमता 5,160 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 9,120 मेगावाट हो गई है। पिछले चार वर्षों में लगभग 4,000 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई है तथा जल्द ही 660 मेगावाट की घाटमपुर परियोजना भी शुरू होने जा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 तक सभी स्रोतों से प्रदेश को कुल 11,803 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 22,000 मेगावाट तक पहुँच गई है।

बढ़ती मांग को देखते हुए ओबरा-D, अनपरा-E, मेजा और मिर्जापुर परियोजनाओं के माध्यम से 10,600 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जा रही है। 

इसके अतिरिक्त वर्ष 2034 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 55,840 मेगावाट क्षमता की व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है।ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ट्रांसमिशन क्षेत्र में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में बड़े सबस्टेशनों की कुल क्षमता 39,000 MVA थी, जो अब बढ़कर 2 लाख MVA तक पहुँच गई है। इसी उपलब्धि के कारण उत्तर प्रदेश के ट्रांसमिशन सेक्टर को देश में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में 30 लाख जर्जर एवं टूटे बिजली पोल बदले गए हैं तथा 1.65 लाख किलोमीटर से अधिक पुराने तारों को AB केबल से बदला गया है। इसके साथ ही 132 केवी के 86 और 33 केवी के 93 नए सबस्टेशन स्थापित किए गए तथा 1500 से अधिक सबस्टेशनों का उन्नयन किया गया। प्रदेश में 10.71 लाख ट्रांसफॉर्मर लगाए, बदले या अपग्रेड किए गए हैं।

कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 तक किसानों को कुल 10 लाख ट्यूबवेल कनेक्शन दिए गए थे, जबकि पिछले आठ वर्षों में 5 लाख अतिरिक्त कनेक्शन दिए गए हैं। आज गांवों में भी न्यूनतम 18 से 20 घंटे तथा शहरों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में निर्बाध बिजली की कल्पना भी नहीं की जाती थी।श्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पिछले छह वर्षों से बिजली दरों में वृद्धि नहीं की गई है। किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है तथा लगभग आधे उपभोक्ताओं को लागत से लगभग आधी कीमत पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश देश में प्रतिदिन सबसे अधिक इंस्टॉलेशन करने वाला राज्य बन गया है। अप्रैल 2026 में यूपी इस योजना में देश में पहले स्थान पर रहा। लखनऊ देश का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला जिला बनकर उभरा है। 4 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन और लगभग 1400 मेगावाट उत्पादन के साथ यूपी देश में तीसरे स्थान पर पहुँच चुका है।उन्होंने कहा कि अयोध्या देश का पहला सोलर सिटी बन चुका है तथा 16 अन्य शहर इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पिछले चार वर्षों में प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता 3000 मेगावाट तक पहुँच गई है तथा 11,000 मेगावाट अतिरिक्त परियोजनाएँ पाइपलाइन में हैं।उन्होंने बताया कि बायो एनर्जी के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 है, जहाँ 25 CBG प्लांट्स के माध्यम से प्रतिदिन 240 टन उत्पादन हो रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी सौर, बायो, जल एवं परमाणु ऊर्जा के माध्यम से प्रधानमंत्री जी के “नेट ज़ीरो 2070” के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि तकनीक और प्रोफेशनल मैनेजमेंट को अपनाने से विभाग की कार्यक्षमता और निष्पादन क्षमता भी बढ़ी है। ट्रांसफॉर्मर फॉल्ट्स कम हुए हैं, बिलिंग त्रुटियों में कमी आई है तथा उपभोक्ता अब आईटी आधारित सिस्टम और ऐप्स के माध्यम से स्वयं अपना बिल बना सकते हैं।अंत में उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बिजली उत्पादन बढ़ा है, आपूर्ति निर्बाध हुई है तथा हर क्षेत्र तक बिजली पहुँचाने वाला बुनियादी ढाँचा भी मजबूत हुआ है।

उत्तर प्रदेश आज ऊर्जा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।

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