साहित्य कला संस्कृति

शिवाजी का चरित्र राष्ट्र के लिए पथ-प्रदर्शक: आशीष भैया

दिल्ली विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में महानाट्य 'जाणता राजा' की तैयारी को लेकर प...

गांधी आज भी प्रासंगिक हैं : बदलते समय में विचारों की अम...

महात्मा गांधी का चिंतन किसी एक दौर या राजनीतिक परिस्थिति तक सीमित नहीं है। सत्य,...

भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार : पत्रकारिता के ‘कल्याण’ मा...

हनुमान प्रसाद पोद्दार ‘भाईजी’ ने ‘कल्याण’ के संपादन के माध्यम से धार्मिक एवं सां...

एक कविता जो नहीं लिखी जा सकती

कुछ भावनाएं शब्दों की मोहताज नहीं होतीं। वे खामोशी, यादों और अधूरे एहसासों में ज...

भारतीय संस्कृति एवं अस्मिता की संवाहक है हिंदी : प्रो. ...

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रक...

डॉ. शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समा...

डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह 31...

विलक्षण प्रतिभा के धनी अभय शर्मा

विलक्षण प्रतिभा के धनी अभय शर्मा

भारतीय ज्ञान परंपरा मर्यादा और मूल्यों की धरोहर है - प्...

डीडीयू में एन ई पी ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन का सातवां दिन

कला या संस्कृति की अभिव्यक्ति भाषा के बिना असम्भव : प्र...

डीडीयू में एनईपी ओरिएंटेशन और सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम का तीसरा दिन

राज्यपाल ने किया 'हिन्दी का गद्य साहित्य' के सोलहवें सं...

आचार्य रामचंद्र तिवारी और हिन्दी का गद्य साहित्य एक दूसरे के पर्याय हैं - शिव प्...

दीक्षोत्सव 2025 कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षांत समारोह की शृंखला के अन...

होली: एक लोक पर्व; बदलता कलेवर: आचार्य ओमप्रकाश मणि

समाज की जीवन्तता का प्रमाण उसकी परिवर्तनशीलता में निहित है।