अमृतवाणी

May 26, 2024 - 20:45
 0  328
अमृतवाणी

अद्भिर्गात्राणि शुद्ध्यन्ति

मन:सत्येन शुद्ध्यति।

विद्यातपोभ्यां भूतात्मा

बुद्धिर्ज्ञानेन शुद्ध्यति।।

 (मनुस्मृति -०५/१०९)

अर्थात - जल से शरीर शुद्ध होता है,सत्य से मन शुद्ध होता है,विद्या और तप से मनुष्य की आत्मा शुद्ध होती है तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

KeshavShukla विभिन्न राष्ट्रीय साहित्यिक-सांस्कृतिक मंचों पर साहित्य विमर्श, कविता, कहानी लेखन ,स्क्रिप्ट लेखन, नाटकों का मंचन, रेडियो स्क्रिप्ट लेखन, उद्घोषणा कार्य एवं पुस्तक समीक्षा।