अमृतवाणी

May 28, 2024 - 22:37
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अमृतवाणी

अद्भिर्गात्राणि शुद्ध्यन्ति मन:सत्येन शुद्ध्यति।

विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुद्ध्यति।।

 (मनुस्मृति -०५/१०९)

अर्थात - जल से शरीर शुद्ध होता है,सत्य से मन शुद्ध होता है,विद्या और तप से मनुष्य की आत्मा शुद्ध होती है तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है।

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