राघवेन्द्र सरकार की सेवा में कोई सेवानिवृत्ति नहीं : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

Jun 3, 2026 - 16:43
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राघवेन्द्र सरकार की सेवा में कोई सेवानिवृत्ति नहीं : जगद्गुरु रामभद्राचार्य
राघवेन्द्र सरकार की सेवा में कोई सेवानिवृत्ति नहीं : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

राम कथा का दूसरा दिन....

कीर्तन से टूटता है माया का बंधन, विश्वास से मिलती है भक्ति की शक्ति

राघवेन्द्र सरकार की सेवा में कोई सेवानिवृत्ति नहीं : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

लखनऊ।

 जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंगलवार को संगीतमय श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस भी नवधा भक्ति की व्याख्या करते हुए कीर्तन और ईश्वर में अटूट विश्वास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति का एक प्रमुख साधन कीर्तन है। संस्कृत में माया को नर्तकी कहा गया है जिसे पलट दें तो कीर्तन हो जाएगा। जब व्यक्ति कीर्तन करता है तो माया का प्रभाव स्वतः समाप्त होने लगता है। उन्होंने कहा कि भक्ति का दूसरा महत्वपूर्ण आधार भगवान के प्रति अटूट विश्वास है। जिस व्यक्ति के जीवन में विश्वास है, उसके लिए ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग सहज हो जाता है।

सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा में उन्होंने कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना कर्म निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कहा है कि कर्म पर मनुष्य का अधिकार है। यदि व्यक्ति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता है तो अधिकार स्वयं उसके समीप आ जाता है। जीवन में सफलता का मार्ग कर्मनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता से होकर गुजरता है।

रामभद्राचार्य ने कहा कि सच्ची सेवा राघवेंद्र सरकार की सेवा है। सरकारी सेवाओं में एक समय के बाद सेवानिवृत्ति हो जाती है, किंतु प्रभु की सेवा में कभी सेवानिवृत्ति नहीं होती। वहां पेंशन की भी चिंता नहीं रहती क्योंकि भगवान स्वयं अपने भक्तों के योगक्षेम का वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन का अधिकाधिक समय लोकमंगल और ईश्वर की सेवा में लगाना चाहिए।

अपने उद्बोधन में रामभद्राचार्य ने रामजन्मभूमि आंदोलन का स्मरण करते हुए कहा कि निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं, कोठारी बंधुओं का इनकाउंटर हुआ और अनेक कारसेवकों ने बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्हें ईश्वर की व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास था और वे मानते थे कि यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 की घटना को वे भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखते हैं जहां भारत के माथे पर लगे कलंक को सरयू में प्रवाहित कर दिया गया। जो ढांचा बुलडोजर से भी नहीं गिराया जा सकता था उसे ध्वस्त किया गया। मैं तो यह मानता हूं कि उसे दिन भगवान का अवतार हुआ था और उसे मैं ‘कारसेवकावतार’ की संज्ञा देता हूं।

कथा के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, नैमिषारण्य हनुमानगढ़ी के महंत पवन दास, विधायक डा. नीरज बोरा, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति सहित अनेक विशिष्ट जनों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर अजीत श्रीवास्तव, आशीष अग्रवाल, भारत भूषण गुप्ता, संजीव अग्रवाल, उत्सव के महामंत्री राकेश पाण्डेय, संयोजक सौरव बन्दोपाध्याय, कनुप्रिया जाजू, बिन्दू बोरा, वत्सल बोरा, सुनील अग्रवाल, डा. अजय गुप्ता सहित यजमानों ने विशेष आरती में सहभागिता की। मीडिया प्रभारी डा. एस.के.गोपाल ने बताया कि बुधवार को श्रीराम कथा सायं पांच बजे से आरंभ होगी।

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