दिल्ली में सोनभद्र का बढ़ रहा है मान

Jun 16, 2024 - 21:17
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दिल्ली में सोनभद्र का बढ़ रहा है मान

दिल्ली में सोनभद्र का बढ़ा रहा मान - स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का उत्पाद 

सोनभद्र ।( मिथिलेश द्विवेदी / भोलानाथ मिश्र ) 

मरहूम सायर मुनीर बख्श आलम

ने ठीक ही कहा है ,_

  ' इसके अपने गीत नगमे ,

   इसका अपना साज है ,

    है जमी जर खेज अपनी ,

    जिस पर सबको नाज है '

     अपने सूबे में कहा जाता है ,

     इसको सोनभद्र , जिंदगी

    जीने का इसका एक अलग

     अंदाज है ' । इसी अलग अंदाज

का परिणाम है कि सोनभद्र की

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

 अपने हाथ के बने सामान को लेकर दिल्ली में चर्चा की प्रथम पायदान पर हैं । ध्वनि पत्रकार इंदु पाण्डेय ने रविवार को दूरभाष से बताया कि बकरी के दूध से बने साबुन हों या बांस का समान दिल्ली हाट में सोनभद्र की शान बड़ा रहें हैं ।

सोनू कुशवाह जो सोनभद्र से आई है इन सामान को लेकर उनका कहना है की दिल्ली हाट में आने वाले लोगो का कौतूहल सोनभद्र को जानने समझ ने में बहुत जादा है। जैसे एक ग्राहक ने पूछा ये वही सोनभद्र है जहाँ आदिवासी रहते है?

संजू कहती है की अपने समान के साथ साथ सोनभद्र का परिचय देना अच्छा लग रहा है । सोनभद्र के तारावां गांव की निवासी श्री श्याम सुंदर उपाख्य फौद पाण्डेय की बेटी

इंदु पांडे भी इस स्टाल पर गई और बकरी के दूध से बना साबुन लिया। 

इंदु की छोटी बहन दिल्ली में ही एक

कालेज में संस्कृत विषय की शिक्षिका हैं । इंदु बीबीसी समेत

आल इण्डिया रेडियो आदि में अपनी

आवाज से पहचान बना चुकी है ।

सोनभद्र की कला , संस्कृति , लोक

कला , लोक उत्पाद आदि को समय

समय पर प्रमोट करती रहती हैं । हरिहर पुर गांव की उनकी माता

जी जागरूक है , जिनकी परवरिस

का असर इंदु पर है । तभी तो लेवा ,

(कथरी ) गोइठा आदि नमूने के रूप

में दिल्ली ले जाती है । फूल का बटुआ , दलहा , भतहा , कड़ाही ,

 काठवति , पथरी आदि दिल्ली ले

जाती हैं ।

दिल्ली हाट जो की अपनी हथकरघा समान के लिए जाना जाता है वो दिल्ली के लोगों में बहुत प्रसिद्ध है

सोनभद्र से राजकुमारी संतरा जो पहली बार दिल्ली आई है बहुत खुश हैं।

दस दिन तक सोनभद्र का स्टाल यहाँ रहेगा ।

इन सबके साथ रवि को इसका श्रेय जाता है जिनकी मेहनत से सोनभद्र की महिलाओ की मेहनत दिल्ली में रंग लाई है।

       राजकीय इण्टर कालेज दिल्ली में प्रवक्ता विधु भूषण बताते है कि

सोनभद्र के बारे में हरियाणा , पंजाब

और दिल्ली के लोग बहुत कुछ जानना चाहते हैं ।

    दिल्ली में ही शिक्षक अंकुर मिश्र

कहते है कि सोनभद्र की दिल्ली में

चर्चा यहां के सौहार्द के कारण भी

होती है । वजह यहां के बारे में कहा

गया है _

     , चेहरे नहीं , इंसान पढ़े जाते है ,

       मजहब नही ईमान पढ़े जाते है ,

      सोनभद्र भी वो जनपद है ,

  जहां एक साथ गीता और कुरान 

  पढ़े जाते हैं '।

         शायद यही वजह है कि कहा

जाता है कि '

     कभी माहताभ सा है ,

     कभी आभताभ सा है ,

     सोनभद्र ये हमारा ,

     खिलते गुलाब सा है '।

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