UTRI लखनऊ और IIM इंदौर के बीच MoU, शहरी निकायों की क्षमता और प्रशिक्षण को मिलेगी नई दिशा
UTRI लखनऊ और IIM इंदौर के बीच MoU, शहरी निकायों की क्षमता और प्रशिक्षण को मिलेगी नई दिशा
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत अर्बन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट UTRI, लखनऊ तथा भारतीय प्रबंध संस्थान IIM, इंदौर के बीच शहरी विकास और क्षमता संवर्धन को नई दिशा देने के लिए आज वर्चुअल माध्यम से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन हस्तांतरित किया गया। नगर विकास विभाग के सचिव एवं UTRI के निदेशक अनुज कुमार झा तथा IIM इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय की उपस्थिति में एमओयू की प्रक्रिया पूर्ण की गई।
इस समझौते के तहत उत्तर प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करने, आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देने और व्यवहार आधारित शहरी प्रशासन विकसित करने पर संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। सूचना, शिक्षा एवं संचार IEC प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। एमओयू के प्रारंभिक चरण में वरिष्ठ अधिकारियों, नगर आयुक्तों, पार्षदों, जनप्रतिनिधियों और UTRI के मेंटर्स के लिए व्यवहार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
इसके बाद ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम होंगे, जिससे प्रदेश भर के शहरी निकायों के लिए एक सुदृढ़ प्रशिक्षण तंत्र विकसित होगा। साथ ही मिशन कर्मयोगी की तर्ज पर ई-लर्निंग और वेबिनार आधारित मॉड्यूल भी तैयार किए जाएंगे। क्षमता संवर्धन, शोध, स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्मार्ट सिटी, यातायात प्रबंधन और IEC रणनीतियों पर भी संयुक्त कार्य होगा। IIM इंदौर शहरी निकायों का Behavioural Analysis कर उनके लिए प्रभावी IEC कार्ययोजना तैयार करेगा।
प्रदेश के उच्च और निम्न प्रदर्शन करने वाले निकायों का तुलनात्मक अध्ययन कर श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अन्यत्र लागू किया जाएगा। नगर विकास सचिव अनुज कुमार झा ने कहा कि यह समझौता ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता संवर्धन और नवाचार आधारित सुशासन को नई दिशा देगा। IIM इंदौर की विशेषज्ञता से विश्वस्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित होगी और शहरी विकास को नागरिक-केंद्रित बनाया जाएगा। प्रो. हिमांशु राय ने कहा कि व्यवहार आधारित प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्वच्छता के प्रति प्रेरणा और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। नियमित समीक्षा और संवाद से सुधारात्मक कदमों पर निरंतर कार्य किया जाएगा।
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