साढ़े तीन माह की गर्भवती महिला का दुर्लभ ऑपरेशन, 15 सेमी की गांठ निकाल मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को बचाया
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने साढ़े तीन माह की गर्भवती महिला के गर्भाशय से 15 सेंटीमीटर की फाइब्रॉएड गांठ सफलतापूर्वक निकालकर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को सुरक्षित बचा लिया। यह ऑपरेशन गर्भावस्था के शुरुआती चरण में की गई दुर्लभ और उच्च जोखिम वाली सर्जरी मानी जाती है।
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सकों ने एक दुर्लभ और अत्यंत चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु दोनों की जान बचा ली। साढ़े तीन माह की गर्भवती महिला के गर्भाशय से 15 सेंटीमीटर की विशाल फाइब्रॉएड (गांठ) को सुरक्षित निकालते हुए चिकित्सकों ने गर्भ को भी पूरी तरह सुरक्षित रखा।
महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र के बसंतपुर निवासी 26 वर्षीय शिम्पा मद्धेशिया, पत्नी निखिल कुमार, 22 जून 2026 को असहनीय पेट दर्द की शिकायत लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी पहुंचीं। जांच के दौरान उनका पेट आठ माह की गर्भवती जैसा दिखाई दे रहा था। अल्ट्रासाउंड में साढ़े तीन माह का जीवित गर्भ तथा गर्भाशय में लगभग 15 सेंटीमीटर की विशाल फाइब्रॉएड गांठ पाई गई, जो दर्द का मुख्य कारण थी।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान इस प्रकार की गांठ का ऑपरेशन नहीं किया जाता, क्योंकि इससे गर्भपात और भ्रूण को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। लेकिन मरीज की गंभीर स्थिति, असहनीय दर्द और समय से पूर्व प्रसव सहित अन्य जटिलताओं की आशंका को देखते हुए चिकित्सकों ने सर्जरी का निर्णय लिया।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका यादव के नेतृत्व में टीम ने अत्यंत सावधानीपूर्वक मायोमेक्टॉमी कर 15 सेंटीमीटर की गांठ सफलतापूर्वक निकाल दी। ऑपरेशन के दौरान गर्भस्थ शिशु पूरी तरह सुरक्षित रहा, जिसे चिकित्सकीय दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस जटिल सर्जरी में जूनियर रेजिडेंट डॉ. रेणु पटेल, डॉ. प्रीति तथा एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार एवं उनकी टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इस सफलता को उच्च स्तरीय चिकित्सा विशेषज्ञता, सटीक निर्णय क्षमता और उत्कृष्ट टीमवर्क का उदाहरण माना जा रहा है।
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