मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का कड़ा रुख: हॉस्टल में शराब-सिगरेट से लेकर पैसों के लेन-देन तक पर उठाए गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का कड़ा रुख: हॉस्टल में शराब-सिगरेट से लेकर पैसों के लेन-देन तक पर उठाए गंभीर सवाल
गोरखपुर(हिन्द भास्कर):- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंची जहां उन्होंने मंच से ही विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
जन भवन की टीम की निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्यपाल ने हॉस्टलों में शराब की बोतलें और सिगरेट के पैकेट मिलने, छात्रों में नशे की प्रवृत्ति, सफाई व्यवस्था की बदहाली, अभिभावकों के बैठने की व्यवस्था न होने और पैसों के लेन-देन जैसे गंभीर मुद्दों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया।
हॉस्टलों की स्थिति पर जताई चिंता
राज्यपाल ने सवाल उठाया कि यदि हॉस्टल में शराब और सिगरेट पहुंच रही है तो यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ हॉस्टलों में कुत्ते घूमते मिले, जबकि छात्र वहीं रह रहे हैं। ऐसी स्थिति किसी भी तकनीकी विश्वविद्यालय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि छात्रावासों में सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है।
कस्तूरबा हॉस्टल के ए और बी ब्लॉक में वर्षों से गंदगी की स्थिति बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि छात्रों से मिलने आने वाले अभिभावकों के बैठने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है और उन्हें सड़क किनारे खड़े होकर अपने बच्चों से मिलना पड़ता है।
भ्रष्टाचार पर भी उठाए सवाल
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंच से कहा कि हर जगह "लेन-देन" की चर्चा होती है और यदि ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने अधिकारियों से व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि जन भवन की टीम की रिपोर्ट के आधार पर तीन महीने के भीतर सभी कमियों को दूर किया जाए और हर स्तर पर सुधार सुनिश्चित किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद की प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी की स्थिति पर जब स्वयं राज्यपाल को सार्वजनिक मंच से इतनी गंभीर टिप्पणियां करनी पड़ें, तो यह विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
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