गोरखपुर: बहुभाषिकता देश की सबसे बड़ी शक्ति, राजनीतिक मनोवृत्ति एकता में बाधा - प्रो. सुरेंद्र दुबे

गोरखपुर: बहुभाषिकता देश की सबसे बड़ी शक्ति, राजनीतिक मनोवृत्ति एकता में बाधा - प्रो. सुरेंद्र दुबे

Sep 15, 2026 - 12:21
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गोरखपुर: बहुभाषिकता देश की सबसे बड़ी शक्ति, राजनीतिक मनोवृत्ति एकता में बाधा - प्रो. सुरेंद्र दुबे

गोरखपुर(हिन्द भास्कर):- बहुभाषिकता देश की सबसे बड़ी शक्ति है और राजनीतिक मनोवृत्ति ही राष्ट्रीय एकता में सबसे बड़ी बाधा है। यह विचार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एवं सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने व्यक्त किए। वे सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता और हिंदी’ विषयक संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

प्रो. दुबे ने ‘कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी’ के माध्यम से भाषा के अपरिवर्तित भाव की चर्चा करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी का गुणधर्म नहीं बदलता, उसी प्रकार भाषा के भाव भी नहीं बदलते। उन्होंने कहा कि हजारों राम कथाएं हैं, जिनके तथ्य और कथ्य अलग हो सकते हैं, लेकिन उनके भाव समान हैं। भाषा की तुलना गाय से करते हुए प्रो. दुबे ने कहा कि गाय अनेक वर्णों की होती हैं, परंतु उनका दूध एक जैसा ही होता है।

यही स्थिति भाषा की है। अपने वक्तव्य के अंत में प्रो. दुबे ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी ने जो किताबें तैयार की हैं, वे अत्यंत उपयोगी हैं। इस अवसर पर एमएजेएमसी के छात्र कुमार सुधांशु सिंह एवं बीएजेएमसी की छात्रा मानसी मिश्र के काव्य-संग्रह ‘बस लिख दीजिए’ का विमोचन भी किया गया। प्रो. दुबे ने विभाग के इन नवोदित रचनाकार विद्यार्थियों की सृजनशीलता की प्रशंसा की और उनके रचनाशील भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

इसके पूर्व विभागीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति के संयोजक प्रो. राजेश कुमार मल्ल ने अपने स्वागत वक्तव्य में मुख्य अतिथि की हिंदी सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रो. दुबे की हिंदी सेवा अप्रतिम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश मिश्र ने कहा कि हिंदी हमारी पहचान और आत्मीयता से जुड़ी भाषा है। उन्होंने हिंदी के साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया।

प्रो. मिश्र ने कहा कि एआई के माध्यम से सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य का सभी भाषाओं में अनुवाद आसान होगा, जिससे राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नरेन्द्र कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. कमलेश कुमार गुप्ता, प्रो. प्रत्यूष दुबे, डॉ. राम नरेश राम, डॉ. संदीप यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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