देशभर में उत्तर प्रदेश की पहल को मिली नई पहचान
देशभर में उत्तर प्रदेश की पहल को मिली नई पहचान
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उत्तर प्रदेश की दो उल्लेखनीय पहलों—वाराणसी के ऐतिहासिक वृक्षारोपण अभियान एवं मेरठ में सौर ऊर्जा के सफल मॉडल—का विशेष उल्लेख करते हुए सराहना की। यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की पहलें राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रही हैं।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को सशक्त रूप से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी में आयोजित वृक्षारोपण अभियान के दौरान मात्र एक घंटे में 2,51,000 से अधिक पौधे लगाए गए, जिससे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित हुआ। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे “जनशक्ति और पर्यावरण चेतना का अद्भुत संगम” बताया।
इस अभियान में विद्यार्थियों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थानों की व्यापक भागीदारी रही, जो सामूहिक प्रयासों की शक्ति को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक पेड़ मां के नाम अभियान का उल्लेख करते हुए देशवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव भी स्थापित करते हैं। इसी प्रकार मेरठ के निवासी अरुण कुमार की सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पहल भी प्रधानमंत्री द्वारा सराही गई।
उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल स्थापित कर न केवल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति की, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में देकर आय का स्रोत भी विकसित किया। उनकी यह पहल उन्हें ‘ऊर्जादाता’ के रूप में स्थापित करती है और समाज को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करती है। मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं समन्वित रूप से संचालित की जा रही हैं।
इन पहलों का उद्देश्य प्रदेश को आत्मनिर्भर, ऊर्जा सक्षम एवं सतत विकास की दिशा में अग्रसर करना है।उन्होंने यह भी कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से संचालित ये अभियान न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सहभागिता की नई संस्कृति विकसित कर रहे हैं।
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