जन्मे है राम रघुरैया, अवधपुर में बाजे बधैया

श्री रामचरितमानस नवान्ह पाठ महायज्ञ द्वितीय दिवस
श्री राम जन्मोंत्सव की सजी दिव्य झांकी
श्री राम जन्मोत्सव पर बाटे गए सोंठ के लड्डू और खिलौने
राबर्ट्सगंज, सोनभद्र।
श्री रामचरितमानस नवान्ह पाठ महायज्ञ के द्वितीय दिवस के अवसर पर श्री राम जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया-
नवमी तिथि मधुमास पुनीता। शुक्ल पक्ष अभिजीत हरिप्रीता मध्य दिवस अति शीत न घामा। पावन काल लोक विश्रामा।
दीनों पर दया करने वाले कौशल्या जी के हितकारी कृपालु प्रभु प्रगट हुए-
भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी।
हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप निहारी।
लोचन अभिराम तनु घनश्यामा निज आयुध भुज चारी।
भूषण मन वनमाला नयन विशाला शोभा सिंधु खरारी।
व्यास आचार्य सूर्य लाल मिश्र के मुखारविंद से निकले इसी छंदों के साथ श्रीराम प्रभु का जन्म हुआ। श्री शालिग्राम को पालने में झूला कर जन्म उत्सव की झांकी दिखाई गई, यजमान सत्यपाल जैन ने सपत्नीक रजनी जैन के साथ पालने की डोर पकड़ कर रस्म निभाई।
इस अवसर पर मानस पांडाल में राम जन्म उत्सव की झांकी सजाई गई, मुद्राएं एवं खिलौने लुटाए गए और सोंठ के लड्डू बांटे गए, पटाखे भी छुड़ाए गए।
इसके एक दिन पूर्व रात्रि प्रवचन के प्रारंभिक क्रम में सुप्रसिद्ध कथावाचक नीरज भैया जी ने संगीतमय शिव विवाह तथा नारद मोह की कथा सुनाते हुए कहा कि विवाह तो बहुत हुए हैं लेकिन शिव विवाह समाज के लिए अनुकरणीय है। शिव ने ससुर का पैर नहीं छुआ इसी के कारण दक्ष प्रजापति ने दमाद को समाज में अपमानित करना चाहा लेकिन भगवान शिव ने इस परंपरा को तोड़ते हुए यह संदेश दिया कि जिसका एक बार पाव पूज लिया जाय उल्टा उससे पैर छुआने पर ससुर का विनाश ही होता है।
कथावाचक नीरज ने नारद मोह की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जैसे नारद को मोह हुआ उसी तरह मनुष्य भी मोह में बंध जाता है। तो भगवान उसका चेहरा ही बिगाड़ देते हैं।
मंच का संचालन आचार्य संतोष कुमार द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर अध्यक्ष सत्यपाल जैन, महामंत्री सुशील पाठक, राकेश तिवारी, हीरा सोनकर रवींद्र पाठक, सुधाकर दुबे, इंद्रदेव सिंह, अयोध्या दुबे, संगम गुप्ता, घनश्याम सिंघल, अशोक गुप्ता, आलोक शुक्ला, रवि जालान, किशोर केडिया, विजय जैन ,विशाल पांडेय,किशोरी सिंह,राजनरायन त्रिपाठी, संजय अग्रवाल, शिवम अग्रवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।
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