हिंदू नव वर्ष के पूर्व संध्या पर अधिवक्ता परिषद ने वैचारिक संगोष्ठी का किया आयोजन।
हिन्द भास्कर,
गोरखपुर।
चैत्र नववर्ष (शुक्ल प्रतिपदा) की पूर्व संध्या पर सिविल कोर्ट, गोरखपुर के सभागार में अधिवक्ता परिषद, गोरखपुर इकाई के तत्वावधान में बुधवार को आयोजित संगोष्ठी का विषय “हमारा संविधान : भाव एवं लेखांकन” रहा, जिसमें अधिवक्ताओं एवं विधि क्षेत्र से जुड़े बुद्धिजीवियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरी बाबू ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डीजीसी प्रियांनंद सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता परिषद गोरखपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. उदयवीर सिंह द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता लक्ष्मी नारायण भाला जी ने अपने उद्बोधन में भारतीय संविधान की मूल भावना, उसके निर्माण की पृष्ठभूमि तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जो न्याय, समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों को संरक्षित करता है।
विशिष्ट अतिथि प्रियांनंद सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को विधिक जागरूकता प्रदान करना भी उनका कर्तव्य है। अध्यक्षीय उद्बोधन में हरी बाबू ने संविधान के प्रति निष्ठा और उसके आदर्शों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर अधिवक्ता परिषद के पूर्व प्रदेश मंत्री ब्रजेन्द्र कुमार सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णानन्द तिवारी, पूर्व अध्यक्ष श्री अभिमन्यु पाण्डेय, गोविन्द शुक्ल, कुमार गौरव , अभिनव, घनश्याम सिंह, अनूप पाण्डेय,विजय मिश्र, विशाल सिंह, आर पी सिंह,गीता अग्रवाल ,CA उपेन्द्र सहित अनेक वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ता तथा उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने विषय पर अपने-अपने विचार रखते हुए संविधान की गरिमा एवं उसकी रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में अधिवक्ताओं की भारी उपस्थिति रही, जिससे यह संगोष्ठी अत्यंत सफल एवं प्रभावशाली सिद्ध हुई। कार्यक्रम का समापन राष्टगान से हुआ। आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा राष्ट्रहित में इसी प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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