महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के गांधी अध्ययन पीठ में त्रिदिवसीय 68 वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ

Jan 10, 2026 - 18:49
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के गांधी अध्ययन पीठ में त्रिदिवसीय 68 वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ

वाराणसी। 10 जनवरी, 2026।

 आल इंडिया इंग्लिश टीचर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के गांधी अध्ययन पीठ में त्रिदिवसीय 68 वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ आज प्रथम दिवस दीप प्रज्जवलन एवं मंगलाचरण से हुआ। एसोसिएशन के जेनेरल सेक्रेटरी प्रो० विकास शर्मा, चेयरमेन प्रो० शिव कुमार यादव, कुलपति प्रो० आनन्द कुमार त्यागी, लोकल सेक्रेटरी प्रो० निशा सिंह, कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर मकरंद परांजपे, कुलपति प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी आदि गणमान्य प्रोफेसर अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम के शुभारम्भ की घोषणा की गई। विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग एवं संस्कृति विभाग की छात्राओं द्वारा विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति की गई। इस कुलगीत के माध्यम से छात्राओं ने विश्वविद्यालय की महिमा एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद मां सरस्वती, महात्मा गांधी, श्री भगवान दास आदि के तैलचित्र पर सभी अतिथियों ने पुष्प अर्पित किया एवं छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ० धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा वैदिक मंत्रों से मंगलाचरण की प्रस्तुति पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी अतिथि एवं एसोसिएशन के सदस्य मंचस्थ हुये एवं स्वागत संभाषण एसोसिएशन के चेयरमेन प्रो० शिव कुमार यादव द्वारा किया। प्रोफेसर यादव ने इस अंग्रेजी एसोसिएशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा एसोसिएशन एक तरह से बौद्धिक अधिवेशन कराता है जिसमें देश भर के अंग्रेजी के शिक्षक एवं छात्र छात्राएं लाभान्वित होते है और यह अधिवेशन एकता में अखंडता को दर्शाता है। जेनेरल सेक्रेटरी प्रो० विकास शर्मा द्वारा एसोसिएशन के बारे में एवं अंग्रेजी शिक्षकों के गुणवत्ता पर एक परिचयात्मक संभाषण प्रस्तुत किया। प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि अंग्रेजी लेखन में लोगों की रुचि कैसे बढ़ी है और बहुत सारे लेखकों के विविध आयाम के साहित्य से हम सभी रूबरू होते है। नारी शिक्षा के महत्व को बताते हुए उन्होंने सभी शोधार्थियों को शोध के प्रति उत्साहित किया। लोकल सेक्रेटरी एवं अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो० निशा सिंह ने अपने उ‌द्बोधन में सभी अतिथियों के लिये स्वागत संभाषण किया एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अधिवेशन की रूप-रेखा पर चर्चा की। अपने अथक प्रयास से अधिवेशन को मूर्त रूप देने में उन्होने कितना प्रयास किया, उसकी भी चर्चा की। अतिथि देवों भव कहकर प्रोफेसर निशा सिंह ने सबके प्रति अपना आभार व्यक्त किया और किसी भी असुविधा के लिए स्वयं को याद करने की बात कहीं। इसके बाद रॉक पेबल्स एवं साइबर लिटरेचर के साथ एसोसिएशन जर्नल पुस्तक लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा हुआ। कार्यक्रम में लाइफ टाईम अचीवमेन्ट अवार्ड प्रो० सुशीला सिंह, डॉ० उर्मिला, प्रो० ज्ञान सिंह गौतम, डॉ० ए०के० धवन आदि विद्वानों को प्रदान किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ० संगीता गुप्ता, डॉ० प्रतनीक बनर्जी, प्रो० वाणीव्रत महंता, प्रो० जे०के० वर्मा आदि प्रोफेसरों ने भी अपने व्यक्तव्य दिये। इसके बाद अधिवेशन के प्रधान वक्ता प्रो० मकरंद परांजपे ने अपना अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने मानविकी विषयों के महत्व को अपने संभाषण में बताया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में किसी भी मुद्दे पर लोगों की विचारधाराएं अलग हो सकती हैं पर हम सब एक होकर राष्ट्र के विकास की बात सोचनी चाहिए। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम् की बात कह कर अधिवेशन में आए सभी अतिथियों को एक परिवार बताया और कहा कि सबकी उन्नति और विकास में ही देश का विकास निहित है। अधिवेशन के संरक्षक एवं माननीय कुलपति प्रो० आनन्द कुमार त्यागी ने अपने आशीर्वचनों से राष्ट्रीय अधिवेशन को सराहा और इंटेलिजेंस पर अपना उद्बोधन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में मां सबसे बड़ी गुरु होती है और व्यक्ति की बुद्धिमता सबसे पहले मां से ही प्राप्त होती है। विश्वविद्यालय शिक्षा में कौन से शिक्षा के नए आयाम जुड़ने चाहिए, इस पर भी उन्होंने बल दिया एवं आयोजन समिति को ऐसे अधिवेशन करवाने के लिए विशेष धन्यवाद भी दिया। विभाग के शोध छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर इस अधिवेशन में हिस्सा लिया। वॉलंटियर के रूप में विभाग के स्नातक वर्ग के छात्र छात्राओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन अराधना सिंह ने किया। मंचीय व्यवस्था में मुख्य रूप से डॉक्टर नीरज धनखड़, डॉक्टर आरती विश्वकर्मा, डॉक्टर किरण सिंह, प्रज्ञा अग्रवाल, शुभम सिंह, वसंत सिंह, आकाश सिंह आदि ने अपना भरपूर सहयोग दिया।

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