भए प्रगट कृपाला दीनदयाल... ___________________________ भोलानाथ मिश्र पत्रकार

Apr 5, 2025 - 22:48
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भए प्रगट कृपाला  दीनदयाल... ___________________________    भोलानाथ मिश्र         पत्रकार

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम  

सनातन संस्कृति को पुष्पित और पल्लवित करने में अपने संपूर्ण जीवन को व्यतीत कर दिए । 

जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महराज पाञ्चजन्य में जनवरी 2021 में प्रकाशित अपने

लेख में कहते है कि " राम भारत की कालजई संस्कृति के उच्चतम प्रतिमान और वैदिक हिन्दू संस्कृति के प्राण हैं । " वेदों में ब्रह्म की जिस

नाम , रूप , गुणधर्म और अवस्थाओं

का प्रतिपादन है , राम स्वयं उसकी

साकार सत्ता हैं । श्रीराम परात्पर ब्रह्म हैं ।

      भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी रही सरोज बाला का श्रीराम पर प्रकाशित शोध में श्रीराम

पर प्रमाणित ऐतिहासिक चरित्र खगोल विज्ञान की कसौटी पर खरा

उतरता हैं ।

      महर्षि वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम के जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की जिस स्थिति का उल्लेख

किया गया है , वे सभी वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरते है ।

           गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम गाथा को लोकभाषा में जन

जन तक पहुंचाकर मन मानस में राम को रचा बसा दिया है ।

        श्री रामजन्भूमि अयोध्या में

भगवान श्री राम लला का अब भव्य

अलौकिक , नव्य मंदिर बनकर लगभग तैयार है । लाखों भक्त दर्शन

पूजन के लिए प्रतिदिन अवधपुरी में

पधार रहे हैं । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,

विश्व हिन्दू परिषद , बजरंगदल ,

के लंबे संघर्ष के बाद उच्चतम न्यायालय के निर्णय से सनातन संस्कृति के प्रतिमूर्ति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम लला

के अद्भुत विग्रह अयोध्या में विराज

मान हुए । लगभग 500 वर्षों के आंदोलन का अब सुखद परिणाम

विश्व देख रहा है । सर्वोच्च न्यायालय

के निर्देशानुसार गठित ट्रस्ट के द्वारा

सनातनियों के समर्पण निधि से अयोध्या बना भव्य श्रीराम मंदिर वास्तव में भारत के स्वाभिमान और

गौरव का राष्ट्र मंदिर विश्व के आस्था

का स्थल बना हुआ है । श्री रामनवमी के दिन दिनकर की रश्मियां मध्याह्न में श्री राम लला के

कलात्मक विग्रह का अभिषेक करेंगी तो पूरी दुनियां इस अलौकिक

दृश्य का देख कर आह्लादित होगी ।

            मानस में वर्णन

           ____________

महर्षि वाल्मीकि के रामायण समेत

लगभग 300 संतों ने श्री रामकथा

को अलग अलग भाषाओं में गाया 

है । गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी 

में श्रीराम गाथा गाया है ।

   ' भए प्रगट कृपाला दीनदयाल ,

      कौशल्या हितकारी ' ।

  मानस मर्मज्ञ सोनभद्र के पण्डित 

लालजी तिवारी का कहना है कि

जब श्री राम का जन्म हुआ था उस

समय भगवान सूर्य भी अपनी चाल 

भूल गए थे । एक महीना बीत गया ।

रात हुई ही नहीं । मानस में बाबा

ने एक दोहा के माध्यम से कहा है _

   मास दिवस कर दिवस भा ,

    मरम न जाने कोइ ।

रथ समेत रवि थकेऊ, निशा कवन

विधि होई ।।

     जन्म के बारे में लिखा है__

नोमी तिथि मधुमास पुनीता ।

शुक्ल पक्ष अभिजीत हरिप्रीता ।।

मध्य दिवस अति सीत न घा मा ।

पावन काल लोक विश्रमा ।।

      खगोलीय स्थिति 

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श्रीराम का जन्म शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था , जब सूर्य

मेष राशि में , शुक्र मीन में , मंगल मकर में , शनि तुला में और वृहस्पति कर्क में थे । इन खगोलीय विन्यासों के अयोध्या के अक्षांश और रेखांश से 10 जनवरी , 5114 वर्ष ई . पूर्व को दिन में 12 से 2 बजे तक देखा गया है । यह उल्लेख अपने शोध प्रबंध में प्रसिद्ध लेखिका सरोज बाला ने प्रकाशित लेख में किया है । उनका मानना है कि राम सेतु को उसी स्थान पर जल मग्न पाया गया है जिस स्थान का वर्णन वाल्मीकि रामायण में किया गया

है ।

      रामायण के अनुसार

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 वाल्मीकि रामायण के अनुसार दिव्य लक्षणों से युक्त एक यशस्वी और प्रतिभाशाली पुत्र को कौशल्या ने जन्म दिया , जिनका नाम राम रखा गया । श्री राम के जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति अदभुत थी ।

       पांच ग्रह अपने अपने उच्च स्थान में थे । सूर्य मेष में , शुक्र मीन में , मंगल मकर में , शनि तुला में और वृहस्पति कर्क में थे । चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र में था । वृहस्पति और चंद्रमा एक साथ कर्क में चमक रह थे । कर्क राशि पूर्व से उदय हो रही थी । शुक्ल चैत्र की नवमी तिथि थी ।

      यह जानकारी सरोज बाला के शोध में वर्णित है ।

भोला नाथ मिश्र 

पत्रकार 

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