आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात लगभग ₹3,862 करोड़ था, जो 2024–25 में बढ़कर ₹44,744 करोड़ तक पहुंच गया है।
इसी तरह, आईटी आधारित सेवाओं का निर्यात ₹55,711 करोड़ से बढ़कर ₹82,055 करोड़ तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के प्रदेश पर बढ़ते भरोसे का भी प्रमाण है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ बने टेक्नोलॉजी हब
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र और लखनऊ अब आईटी सेवाओं, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और डेटा आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं।
प्रदेश में स्थापित हो रही असेंबली यूनिट्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और आईटी सर्विस कंपनियों ने उत्तर प्रदेश की निर्यात क्षमता को नई मजबूती दी है।
युवाओं के लिए बढ़े रोजगार और उद्यमिता के अवसर
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित उद्योगों के विस्तार से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो रहे हैं।
तकनीकी प्रशिक्षण, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से युवा अब केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के वाहक बन रहे हैं।
निवेश अनुकूल नीतियों से बढ़ा वैश्विक भरोसा
प्रदेश सरकार द्वारा लागू सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, बेहतर लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया है।
नीतिगत सुधारों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के चलते आईटी, डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में लगातार नए निवेश आ रहे हैं।
आगे की दिशा
उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि आधुनिक प्रौद्योगिकी, आईटी सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश का यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश को भारत के डिजिटल और तकनीकी भविष्य का प्रमुख स्तंभ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।