2007 में अधिकारी के रूप में शुरू हुई जापान यात्रा 2026 में बनी निवेश का सेतु - ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा
2007 में अधिकारी के रूप में शुरू हुई जापान यात्रा 2026 में बनी निवेश का सेतु - ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भारत-जापान संबंधों को लेकर अपने दीर्घ अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से शुरू हुई उनकी जापान यात्रा आज 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में नई साझेदारी का महत्वपूर्ण अवसर बन गई है। मंत्री शर्मा ने बताया कि वर्ष 2007 में गुजरात में आईएएस अधिकारी के रूप में उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जापान यात्रा पर जाने का अवसर मिला था।
इस यात्रा का उद्देश्य उद्योग, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करना था। इसके बाद 2012 में भी वे प्रधानमंत्री के साथ जापान यात्रा में शामिल हुए, जब गुजरात और जापान के बीच संस्थागत और औद्योगिक सहयोग का विस्तार हो रहा था। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन यात्राओं के दौरान उन्हें जापान की अत्याधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और नवाचार की कार्यसंस्कृति को करीब से समझने का मौका मिला।
आज ऊर्जा मंत्री के रूप में उसी संबंध को नई भूमिका में आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जापान के यामानाशी प्रांत के साथ उत्तर प्रदेश का सहयोग हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, पावर-टू-गैस तकनीक और सतत विकास के क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोलेगा। यह साझेदारी प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाएगी। मंत्री शर्मा ने कहा कि 2007 में एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में शुरू हुआ यह सफर आज उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के रूप में भारत-जापान साझेदारी के नए अध्याय को मजबूत करने की जिम्मेदारी बन गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन ने उन्हें सीखने और देश-प्रदेश की सेवा करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि जापान से सीखने की यात्रा अब जापान के साथ मिलकर निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो ऊर्जा परिवर्तन और हरित प्रौद्योगिकी के नए आयाम स्थापित करेगी।
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