त्योहारों से पहले चीनी ₹60 पार, सरकार ने डीलरों पर लगाया स्टॉक लिमिट का शिकंजा: क्या इथेनॉल की कीमत चुकाएगी आम रसोई?
त्योहारों से पहले चीनी ₹60 पार, सरकार ने डीलरों पर लगाया स्टॉक लिमिट का शिकंजा: क्या इथेनॉल की कीमत चुकाएगी आम रसोई?
नई दिल्ली(हिन्द भास्कर):- केंद्र सरकार ने आने वाले त्योहारों में चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आप को बता दे कि केंद्र सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
तीन हफ्ते में 11.50 रुपये महंगी हुई चीनी
त्योहारों की दस्तक के साथ ही देश की रसोई से मिठास गायब होने लगी है। अब चीनी के मिठास का असर आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है और गृहणियों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है। महज तीन सप्ताह के भीतर चीनी के दाम थोक बाजार में 47 रुपए प्रति किलो से उछलकर 58.50 से 60 रुपये तक जा पहुंचे हैं, जबकि खुदरा बाजार में उपभोक्ता इसे 61 रुपए प्रति किलो खरीदने को मजबूर है।
चीनी में आई 11.50 रुपए प्रति किलो की यह बेतहाशा बढ़ोतरी सीधे तौर पर गन्ने के बड़े हिस्से को चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल में डायवर्ट करने का नतीजा मानी जा रही है।
सवाल - पेट्रोल सस्ता नहीं तो फायदा किसे?
इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाने के पीछे सरकार पेट्रोलियम आयात कम करने और किसानों को फायदा पहुंचाने की बात करती रही है। लेकिन सवाल यह है कि अगर पेट्रोल सस्ता नहीं हुआ, तो आम आदमी को इसका फायदा आखिर मिला कहां? एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी की कीमतें बढ़कर ₹60 प्रति किलो के पार पहुंच गई हैं और आने वाले त्योहारों के बीच घरेलू बजट पर इसका असर और बढ़ सकता है।
यानी पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का फायदा आम जनता की जेब तक कितना पहुंचा, यह अलग सवाल है; लेकिन अगर इसकी पूरी प्रक्रिया का असर खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ने के रूप में सामने आने लगे, तो सरकार से जवाब जरूर पूछा चाहिए।
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