बलरामपुर गार्डन पुस्तक मेला:'अथर्व संवाद' का आयोजन; शुरू होगा 6 महीने का अवधी डिप्लोमा कोर्स
लखनऊ के बलरामपुर गार्डन स्थित पुस्तक मेले में अथर्व इण्डिया अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान द्वारा 'अथर्व संवाद' का आयोजन किया गया। 'अवधी साहित्य एवं संस्कृति' विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह मुख्य अतिथि रहीं। संस्थान ने अवधी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आगामी देव उठानी एकादशी से 6 महीने का विशेष डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की घोषणा की है, जिसके संचालन के लिए वरिष्ठ विद्वानों की टीम तैयार की जा रही है।
लखनऊ, 5 अक्टूबर 2026: राजधानी के बलरामपुर गार्डन में आयोजित पुस्तक मेले में सोमवार को अथर्व इण्डिया अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान द्वारा 'अथर्व संवाद' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष संवाद का मुख्य विषय 'अवधी साहित्य एवं संस्कृति' रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के संस्थापक और प्रबंध निदेशक डॉ. वी. पाण्डेय ने की, मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह उपस्थित रहीं।
विद्वानों ने अवधी विरासत पर डाला प्रकाश:
संवाद सत्र के दौरान प्रो.हरिशंकर मिश्र, डॉ. राम बहादुर मिसिर, नागेंद्र बहादुर सिंह चौहान, प्रदीप सारंग और मंच की ख्यातिलब्ध कवयित्री डॉ. मानसी द्विवेदी ने अवधी साहित्य और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभी विद्वानों ने अवधी भाषा को संरक्षित कर इसे शीर्ष पर पहुँचाने का दृढ़ संकल्प लिया।
6 महीने के डिप्लोमा पाठ्यक्रम की घोषणा:
अवधी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए संस्थान ने 6 माह के 'अवधी साहित्य एवं संस्कृति डिप्लोमा पाठ्यक्रम' को प्रारंभ करने की बड़ी घोषणा की। यह पाठ्यक्रम विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों, युवाओं तथा जनसामान्य के लिए उपलब्ध रहेगा। इसकी विधिवत शुरुआत आगामी देव उठानी एकादशी के पावन पर्व से की जाएगी। इस पाठ्यक्रम को संचालित करने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों व विद्यालयों के प्रोफेसर और विद्वानों ने अपना सहयोग देने का निर्णय लिया है।
वरिष्ठ विद्वानों की टीम संभालेगी कमान:
पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन हेतु राजधानी के वरिष्ठ विद्वानों की एक विशेष टीम बनाई जा रही है, जिसमें डॉ. मनोरमा सिंह, कुमार तरल, आनंद श्रीवास्तव और डॉ. किरण सिंह आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान की कार्यक्रम निदेशक अनिशा कुमारी एवं डॉ. जय प्रकाश तिवारी द्वारा किया गया।
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