युवा सनातन संस्कृति के रक्षक बनें - एकनाथ शिंदे, काशी विद्वत परिषद ने दिया धर्म ध्वजा धारक सम्मान

संस्कृति संसद के दूसरे दिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सनातन धर्म जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं। राजनीति का स्थान धर्म के बाद है। उन्होंने युवाओं से सनातन संस्कृति के रक्षक बनने का आह्वान किया। इस अवसर पर काशी विद्वत परिषद ने उन्हें ‘धर्म ध्वजा धारक’ सम्मान से सम्मानित किया और दक्षिण भारत के संतों ने सेंगोल भेंट किया।

Nov 4, 2026 - 21:01
 0  14
युवा सनातन संस्कृति के रक्षक बनें - एकनाथ शिंदे, काशी विद्वत परिषद ने दिया धर्म ध्वजा धारक सम्मान

वाराणसी।

सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति संसद के दूसरे दिन के अंतिम सत्र में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि भारतीय संस्कृति अनादिकाल से नदी की अविरल धारा के समान निरंतर प्रवाहित हो रही है। सनातन धर्म जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं।

उन्होंने कहा कि काशी और महाराष्ट्र का संबंध पुराना है। काशी विद्वत परिषद के पंडित गागाभट्ट ने छत्रपति शिवाजी का राजतिलक कराया था। महाराष्ट्र संतों की भूमि है और काशी ज्ञान व अध्यात्म की भूमि है। धर्म ही सर्वोच्च सत्ता है, धर्म के संपर्क में आने से राजनीति पवित्र होती है।

युवाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि युवा सनातन संस्कृति के रक्षक और वाहक हैं। कई शक्तियां युवाओं के आक्रोश की आड़ में राष्ट्रविरोधी खेल खेल रही हैं, पर वे सफल नहीं होंगी। भारत का युवा धर्म और संस्कृति का सम्मान करता है।

इस अवसर पर श्रीकाशी विद्वत परिषद ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए किए गए कार्यों के लिए एकनाथ शिंदे को ‘धर्म ध्वजा धारक’ उपाधि से सम्मानित किया। शिंदे ने कहा यह सम्मान महाराष्ट्र की जनता का सम्मान है। दक्षिण भारत के संतों ने उन्हें सेंगोल भी भेंट किया। कार्यक्रम का समापन सत्र स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने संचालित किया।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Keshav Shukla साहित्यकार, उद्घोषक, पत्रकार