नकली पनीर के नाम पर अब नहीं बेच सकेंगे जहर! FSSAI का बड़ा फैसला, 'पनीर' शब्द पर ही लगा दिया बैन
FSSAI ने नकली पनीर पर बड़ी रोक लगाई। अब दूध से नहीं बना उत्पाद 'पनीर' नहीं कहलाएगा। Analogue Dairy उत्पादों में 'पनीर' शब्द पर पूर्ण प्रतिबंध, 60 दिन में सुझाव आमंत्रित।
नई दिल्ली(हिन्द भास्कर ब्यूरो):- अगर आप बाजार से पनीर खरीदते हैं तो ये खबर आपके लिए है। अब तक होटलों, रेस्टोरेंट और शादी-पार्टियों में असली पनीर के नाम पर जो नकली पनीर परोसा जा रहा था, उस पर केंद्र सरकार ने बड़ी रोक लगाने की तैयारी कर ली है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भारत के राजपत्र में एक ऐतिहासिक ड्राफ्ट जारी किया है। हिन्द भास्कर के पास मौजूद राजपत्र की कॉपी *सं. 573, दिनांक 23 सितंबर 2026 (CG-DL-E-23092026-276430)* के अनुसार FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और मानक (विक्री पर प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
क्या है नया नियम?
FSSAI ने विनियम 2.1 में नया खंड 2.1.1 (11) के बाद खंड *"(12) दूध से व्युत्पन्न घटकों से निर्मित न किया गया पनीर"* जोड़ने का प्रस्ताव किया है।
साफ शब्दों में इसका मतलब है —
जो उत्पाद 100% दूध या दूध के घटकों से नहीं बना है, उसे अब पनीर कहा ही नहीं जा सकेगा।
*'Analogue in Dairy Context'* श्रेणी में पंजीकृत उत्पाद भी अपने नाम, लेबल या किसी भी तरह के प्रचार-प्रसार में *'पनीर'* शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें 'डेयरी एनालॉग' या 'एनालॉग पनीर' जैसा भ्रामक नाम भी नहीं देना होगा।
क्यों लिया गया फैसला?
राजपत्र में FSSAI ने साफ लिखा है — "उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति और संघटन के संबंध में भ्रामक जानकारी दिए जाने से रोकने के लिए" यह कदम उठाया गया है।
दरअसल, बाजार में वनस्पति तेल, स्टार्च और पाम ऑयल से बना सस्ता एनालॉग उत्पाद असली पनीर से आधे दाम पर बेचा जा रहा था, जिससे न सिर्फ उपभोक्ता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा था, बल्कि दुग्ध किसानों को भी नुकसान हो रहा था।
अब क्या होगा?
यह अभी ड्राफ्ट है। FSSAI ने इस पर जनता से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। कोई भी व्यक्ति अपना सुझाव मुख्य कार्यकारी अधिकारी, FSSAI, FDA भवन, कोटला रोड, नई दिल्ली - 110002 या ईमेल *regulation@fssai.gov.in* पर भेज सकता है।
60 दिन बाद प्राप्त सुझावों पर विचार कर इसे अंतिम रूप से लागू कर दिया जाएगा। बनारस और पूर्वांचल के होटल व्यवसायियों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, जहां त्योहारी सीजन में नकली पनीर की खपत सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।
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