संघ निर्भ्रांत रूप से "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः" का सात्विक एवं अभय पुजारी है-पारसनाथ मिश्र

Jan 2, 2026 - 21:31
Jan 2, 2026 - 21:42
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संघ निर्भ्रांत रूप से "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः" का सात्विक एवं अभय पुजारी है-पारसनाथ मिश्र

हिन्द भास्कर 

सोनभद्र।

 सकल हिंदू समाज के द्वारा शुक्रवार को विकास खण्ड छपका के परासी न्याय पंचायत का मानपुर पंचायत भवन प्रांगण में व पसही न्याय पंचायत का ग्रामोदय शिशु मंदिर बहुअरा के प्रांगण में तथा विकास खण्ड चतरा के सिलथम न्याय पंचायत का आदिवासी इंटरमीडिएट कॉलेज सिल्थम के प्रांगण में क्रमशः राजीव कुमार मिश्र,संतोष चौबे,पारसनाथ मिश्र के मुख्यातिथि में हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय चिंतक एवं लेखक पारसनाथ मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने प्रत्येक कार्य को करने से पहले भारत माता को भू सांस्कृतिक देवी मानकर अपने आचरण ध्वज के समक्ष श्रद्धा एवं अतिव निष्ठा से नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि के रूप में सादर नमन निवेदित करता है।संघ निर्भ्रांत रूप से "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः" का सात्विक एवं अभय पुजारी है।"जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी" का शुचि साहसिक विश्वासी है, और"सर्वे भवन्तु सुखिनः" का आतुर अभिलाषी हैं। इसके रोम रोम में लोकमंगल एवं राष्ट्रीय सर्वोपरिता का पावन प्रवाह प्रतिपल प्रवाहित होता रहता है राष्ट्रहित इसका पावन प्राण है और राष्ट्र सेवा इसके निर्विकार हृदय की धड़कन है। इसकी श्वास श्वास वैयक्तिक में अस्मिता और सुसंगठित सामाजिकता का अप्रतिहत सामंजस्य एवं अद्भुत समन्वय है। आत्मिक अनुशासन प्रियता उसका निर्मल स्वभाव है। उदात्त जीवन मूल्यों के अनुरक्षण में इसकी सामूहिक कर्णीयता अबाध एवं अक्षुण्ण है। भारतीयता इसकी आकृति और मानवता इसका धर्म है। समष्टि हित में व्यक्ति की निजता के विसर्जन का वह सतत आकांक्षी है नग्न भोग नहीं वरन त्यागमय जीवन ही संघ की जीवनचर्या है। वैश्विक सुख शांति का संघ सतत चिरआग्रही है। वह एकता का साक्षी बन अनेकता का सेवक है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रक्त,जाति,वंश,क्षेत्र और भाषादि के आधार पर मानव श्रेष्ठता का निर्धारण नहीं करता वरन पावन समता की भूमि पर ईश्वरीय सत्ता के अनन्तानन्त विभूतियों का निस्पृह आराधक है। सौ वर्षों से अपनी अनवरत आस्थाओं की अविरल साधना द्वारा बहुआयामी रूप में विविध क्रिया कलापों को मूर्तमान करता हुआ हिंदुत्व को जिस प्रकार प्रकर्षोन्मुख गढ़ा है वह शब्दातीत है हिंदुत्व की रक्षा उसका पवित्र व्रत है और राष्ट्र सेवा उसके जीवन का पावन संकल्प है जितना तीव्र विरोध हुआ उससे अधिक तीव्रता से संघ नित्य आगे बढ़ता रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सतीश ने किया।

कार्यक्रम में हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति के जिला संयोजक आलोक कुमार चतुर्वेदी, खंड संयोजक नंदलाल विश्वकर्मा,खंड सहसंयोजक रमेश चौबे,निर्भय शंकर पांडे,लालू प्रसाद यादव,भूपेंद्र सिंह,राहुल जी प्रचारक,मुन्ना धागर,बुद्धिनारायण धागर,सत्य प्रताप सिंह,सिद्धि शरणार्थी,श्रवण जायसवाल,मोहन बिन्द,सुनील सिंह,शताब्दी वर्ष हर घर सम्पर्क अभियान जिला संयोजक अरुणेश पाण्डेय,वीरेंद्र प्रताप सिंह,किरन त्रिपाठी,अमरेश चेरो, योगेंद्र बिन्द,जय शंकर यादव आदि लोग उपस्थित रहे।

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19वीं पुस्तक "प्रिय लागहूं मोहि राम" शीघ्र होगी प्रकाशित

सोनभद्र। पारसनाथ मिश्र जी पूर्व प्रवक्ता हैं तथा इन्होंने अब तक कुल 18 पुस्तकें लिखी हैं, इनके द्वारा भरत पर महाकाव्य "रामानुज भरत" लिखा गया है जिसकी सराहना पूज्य शंकराचार्यो,धर्म गुरुओं,शिक्षाविदों ने किया है। इनकी 19वीं पुस्तक "प्रिय लागहूँ मोहि राम" है जो शीघ्र ही प्रकाशित होगी।

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