सतत विकास की चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान है जैव प्रौद्योगिकी : प्रो. रमा शंकर दुबे
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो सप्ताह के ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स "बायोटेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट" का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. रमा शंकर दुबे ने सतत विकास की चुनौतियों के समाधान में जैव प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
डीडीयू विश्वविद्यालय के एमएमटीटीसी एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो सप्ताह के रिफ्रेशर कोर्स का ऑनलाइन शुभारंभ, देशभर के 60 प्रतिभागी शामिल
गोरखपुर, 20 जुलाई।
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो सप्ताह के ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स "बायोटेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट" का शुभारंभ सोमवार को हुआ।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), नई दिल्ली के चांसलर प्रो. रमा शंकर दुबे ने उद्घाटन व्याख्यान में कहा कि जैव प्रौद्योगिकी आज खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सतत विकास की चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति से लेकर आधुनिक चिकित्सा, कृषि, औद्योगिक उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण तक जैव प्रौद्योगिकी ने अभूतपूर्व परिवर्तन किए हैं।
प्रो. दुबे ने बीटी कपास, पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी के माध्यम से ई. कोलाई से इंसुलिन उत्पादन, पोलियो नियंत्रण तथा वैक्सीन निर्माण में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व में उपयोग होने वाली लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीनों के निर्माण में भारत का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बायोफर्टिलाइज़र, ब्लू-ग्रीन एल्गी, एजोला, ट्राइकोडर्मा आधारित जैव-कीटनाशकों, जैव-ईंधन, हरित ऊर्जा तथा हाइड्रोजन आधारित ईंधन पर अनुसंधान को समय की आवश्यकता बताया। साथ ही विद्यार्थियों में कौशल विकास, उद्यमिता और अंतर्विषयी दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष बल दिया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने अध्यक्षीय संदेश में कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल ज्ञान का विस्तार नहीं, बल्कि मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति भी होना चाहिए।
यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी के नवीन आयामों तथा सतत विकास से जुड़े समकालीन विषयों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में एमएमटीटीसी शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास के लिए गुणवत्तापरक संकाय विकास कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन कर रहा है।
पाठ्यक्रम समन्वयक एवं जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश यादव ने रिफ्रेशर कोर्स की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी।
इस रिफ्रेशर कोर्स में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू तथा असम सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 60 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इनमें जैव प्रौद्योगिकी, आणविक जीवविज्ञान, जैवरसायन, सूक्ष्मजीव विज्ञान, आनुवंशिकी, जैव-सूचना विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान तथा अन्य जीवन विज्ञान विषयों के शिक्षक, शोधार्थी और वैज्ञानिक शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवन कुमार दोहरे ने किया, जबकि अंत में प्रो. शरद कुमार मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। यह रिफ्रेशर कोर्स 20 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
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