मेरी कविताओं की जड़ें परिवार, रिश्तों और अपनी माटी की संवेदनाओं में हैं — डॉ. ओम प्रकाश

Sep 10, 2026 - 19:03
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मेरी कविताओं की जड़ें परिवार, रिश्तों और अपनी माटी की संवेदनाओं में हैं — डॉ. ओम प्रकाश
एनटीपीसी शक्तिनगर के उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन–राजभाषा) एवं प्रख्यात कवि डॉ. ओम प्रकाश
मेरी कविताओं की जड़ें परिवार, रिश्तों और अपनी माटी की संवेदनाओं में हैं — डॉ. ओम प्रकाश

(‘माटी महकी सम्मान–2026’ से अलंकृत हुए ‘विदा होती बेटियाँ’ के रचनाकार; भावपूर्ण काव्य-पाठ ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध)

शक्तिनगर, सोनभद्र

 “मेरी कविताओं की जड़ें परिवार, रिश्तों और अपनी माटी की संवेदनाओं में हैं। माँ-पिता का स्नेह और संघर्ष, बेटियों की निश्छलता, रिश्तों की आत्मीयता तथा हमारे आसपास के साधारण मनुष्य का सुख-दुःख ही मेरी कविता की वास्तविक पूँजी है।” ये भाव डॉ. ओम प्रकाश ने साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सोन संगम द्वारा ‘माटी महकी सम्मान–2026’ से सम्मानित किए जाने के बाद अपने संबोधन में व्यक्त किए।

अवधी एवं हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा की जयंती के उपलक्ष्य में 09 सितम्बर 2026, बुधवार की शाम विद्युत विहार आवासीय परिसर, शक्तिनगर में आयोजित सम्मान समारोह एवं काव्य-संध्या में एनटीपीसी शक्तिनगर के उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन–राजभाषा) एवं प्रख्यात कवि डॉ. ओम प्रकाश को हिंदी भाषा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्था के सातवें ‘माटी महकी सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि एआरएम, विंध्यनगर डिपो नागेन्द्र पाण्डेय रहे। अध्यक्षता सोनभद्र के लब्धप्रतिष्ठित लोककवि जगदीश पंथी ने की, जबकि अवधूत भगवान राम महाविद्यालय, अनपरा के प्राचार्य डॉ. अजय विक्रम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सम्मान स्वीकार करते हुए डॉ. ओम प्रकाश ने कहा, “जिस सम्मान के नाम में ही ‘माटी’ की महक हो, उससे जुड़ना मेरे लिए अत्यंत आत्मीय अनुभव है। यह सम्मान स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा जी जैसे साहित्य-साधक की स्मृति से जुड़ा है, इसलिए इसका महत्व मेरे लिए और बढ़ जाता है।” उन्होंने कहा कि “कविता की दुनिया में बड़ी बातें कहने से अधिक जरूरी उन छोटी-छोटी मानवीय अनुभूतियों को बचाना है, जिन्हें भागती हुई जिंदगी अक्सर पीछे छोड़ देती है। मेरी कोशिश इन्हीं अनुभूतियों को शब्द देने की रही है।”

उल्लेखनीय है कि स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा की स्मृति में ‘माटी महकी सम्मान’ अनेक वर्षों से प्रदान किया जा रहा है। इससे पूर्व हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा, जगदीश पंथी, माहिर मिर्जापुरी, अजय चतुर्वेदी कक्का, गोपाल तिवारी एवं शिवशंकर मिश्र सरस इस सम्मान से अलंकृत हो चुके हैं।

कार्यक्रम का आरंभ स्व. डॉ. शालिग्राम शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ। सतीश सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। चन्द्रशेखर जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया तथा डॉ. शर्मा के पुत्र डॉ. योगेन्द्र मिश्र ने उनकी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। मुख्य अतिथि नागेन्द्र पाण्डेय एवं अध्यक्ष जगदीश पंथी ने संस्था की इस साहित्यिक परंपरा की सराहना करते हुए डॉ. ओम प्रकाश को शुभकामनाएँ दीं।

इसके बाद आयोजित काव्य-संध्या में डॉ. ओम प्रकाश की कविताओं ने रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं का भावपूर्ण संसार रचा। उनके चर्चित काव्य-संग्रहविदा होती बेटियाँ’ की शीर्षक कविता की पंक्तियाँ—“विदा होती जाती हैं बेटियाँ, जैसे विदा हो जाती है आँगन की धूप, चुप हो जाती हैं मंदिर की घंटियाँ”—ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। ‘पिता के सपने’ में पिता की आकांक्षाएँ, ‘माँ का अकेलापन’ में माँ की प्रतीक्षा और ‘प्रेम पत्र’ में प्रेम की अनुभूति ने श्रोताओं को गहराई से छुआ। “सबसे कठिन है पत्थर दिल होती दुनिया में प्रेम बचाए रखना” जैसी पंक्तियों को भी विशेष सराहना मिली।

अध्यक्ष जगदीश पंथी की “बड़ा नीक लागे ननद तोर गउँवा” और “प्रेम तुम्हारा मिला कि सावन बरस गया” ने लोक-संवेदना और माटी की सोंधी महक से वातावरण भर दिया। माहिर मिर्जापुरी, डॉ. योगेन्द्र मिश्र, डॉ. अजय विक्रम, डॉ. देवेन्द्र श्रीवास्तव, सचिन मिश्र, रमाकान्त पाण्डेय, बहर बनारसी तथा विजयलक्ष्मी पटेल सहित अनेक कवियों ने अपनी सारगर्भित एवं सशक्त रचनाएँ प्रस्तुत कीं। खड़ी बोली के साथ विभिन्न लोकभाषाओं में हुए काव्य-पाठ ने श्रोताओं को देर रात तक बाँधे रखा।

समारोह में सोन संगम के कार्यकारी अध्यक्ष विजय दुबे, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ शक्तिनगर परिसर के प्रभारी डॉ. प्रदीप यादव, विवेकानन्द वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य अरविन्द मौर्य, केन्द्रीय विद्यालय शक्तिनगर के उप-प्रधानाचार्य मृत्युंजय सिंह, डॉ. छोटेलाल प्रसाद, मायाराम, डॉ. योगेन्द्र वी.एस. तिवारी, राजनाथ दुबे, आदिप सिंह चौहान, सुशील सिंह, उदय नारायण पाण्डेय, करुणा माथुर, रीता पाण्डेय, सौम्या, समिधा एवं गौतमी सहित क्षेत्र के  नागरिक एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉगणमान्य. मानिक चन्द पाण्डेय ने किया।

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