एक कविता जो नहीं लिखी जा सकती
कुछ भावनाएं शब्दों की मोहताज नहीं होतीं। वे खामोशी, यादों और अधूरे एहसासों में जीवित रहती हैं। ‘एक कविता जो नहीं लिखी जा सकती’ ऐसी ही अनकही भावनाओं को शब्द देने का प्रयास है।
एक कविता जो नहीं लिखी जा सकती
— केशव शुक्ल
एक कविता है
जो लिखी नहीं जा सकती,
क्योंकि उसमें शब्दों से ज्यादा
खामोशियां हैं।
उसे लिखना चाहूं तो
स्याही सूख जाती है,
कागज भी जैसे
कुछ कहने से डर जाता है।
उसमें तुम्हारी याद है,
मगर तुम्हारा नाम नहीं,
उसमें एक रिश्ता है,
मगर उसका कोई अंजाम नहीं।
वह कविता
उन अधूरे सपनों की है
जो आंखों में तो रहे,
मगर हकीकत में कभी उतर नहीं पाए।
वह उन आंसुओं की है
जो पलकों तक आए,
और मुस्कुराकर
वापस लौट गए।
उसमें बिछड़ने का दर्द है,
मगर शिकायत नहीं,
पास होने की चाहत है,
मगर कोई ज़िद नहीं।
मैं हर बार
उस कविता को लिखने बैठता हूं,
कुछ शब्द लिखता हूं,
फिर मिटा देता हूं।
क्योंकि कुछ एहसास
लिखे नहीं जाते—
सिर्फ महसूस किए जाते हैं।
और शायद...
वह कविता इसलिए नहीं लिखी जा सकती,
क्योंकि वह कविता नहीं,
किसी के दिल में बची हुई
एक पूरी दुनिया है।
What's Your Reaction?
