वंदे मातरम् के विरोध को लेकर कांग्रेस पर बरसे अतिवीर जैन, बोले—‘कांग्रेस के लिए गांधी परिवार ही संविधान?’
कर्नाटक सरकार के वंदे मातरम् से जुड़े आदेश को लेकर पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय एवं स्तंभकार इंजीनियर कवि अतिवीर जैन पराग ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का रुख संविधान और राष्ट्रभावना के विपरीत है। जैन ने चुनाव आयोग से कांग्रेस की मान्यता रद्द करने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही कर्नाटक सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग भी उठाई है।
वंदे मातरम् के विरोध को लेकर कांग्रेस पर निशाना, चुनाव आयोग से मान्यता रद्द करने की मांग
मेरठ। कर्नाटक सरकार द्वारा राजकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो पद गाए जाने संबंधी आदेश को लेकर पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय एवं कवि-स्तंभकार इंजीनियर अतिवीर जैन पराग ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे संविधान विरोधी बताते हुए चुनाव आयोग से कांग्रेस की मान्यता रद्द करने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की है।
अतिवीर जैन पराग ने कहा कि कर्नाटक सरकार के आदेश में राजकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के दो पद गाने की बात कही गई है, जबकि प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में सभी छह पद गाने की व्यवस्था बताई गई है। उनके अनुसार यह व्यवस्था अपने आप में विरोधाभासी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वंदे मातरम् को लेकर संसद अथवा संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से कोई व्यवस्था निर्धारित है तो किसी राज्य सरकार द्वारा उसके विपरीत आदेश जारी करना संवैधानिक दृष्टि से कितना उचित है। उन्होंने कर्नाटक के राज्यपाल से भी इस मामले में अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करने की मांग की।
जैन ने कहा कि विपक्षी दल भाजपा को भी इस आदेश को न्यायालय में चुनौती देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में गांधी परिवार का प्रभाव इतना अधिक है कि पार्टी संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर परिवार को प्राथमिकता देती दिखाई दे रही है।
उन्होंने वंदे मातरम् के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1937 में मुस्लिम लीग की आपत्ति के बाद कांग्रेस के अधिवेशन में इसके दो पद गाने का निर्णय लिया गया था। उनके मुताबिक उस समय देश की एकता और स्वतंत्रता का संघर्ष चल रहा था, इसलिए तत्कालीन परिस्थितियों में कांग्रेस के फैसले को अलग संदर्भ में देखा जा सकता है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद परिस्थितियां बदलने के बावजूद इस परंपरा को जारी रखना उचित नहीं है।
अतिवीर जैन पराग ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों के विषय में स्पष्ट और समान नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी ऐसी नीतियों पर आगे बढ़ रही है, जिससे समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने चुनाव आयोग से कांग्रेस की गतिविधियों और उसके कथित संविधान विरोधी रुख का संज्ञान लेने तथा पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग भी उठाई।
जैन ने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रभावना से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों को दलगत हितों से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के मौजूदा रुख से जनता के बीच उसके प्रति असंतोष बढ़ सकता है और पार्टी राजनीतिक रूप से कमजोर हो सकती है।
इंजी. कवि अतिवीर जैन ‘पराग’ पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय, कवि, स्तंभकार, साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी चाहिए।
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