प्रयोग, विश्लेषण और नवाचार से ही सशक्त होगा वैज्ञानिक अनुसंधान : प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–एमएमटीटीसी में ‘एक्सपेरिमेंटल टेक्नीक्स एंड डेटा एनालिसिस इन फिजिक्स’ विषयक छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल ने गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रयोग, डेटा विश्लेषण और नवाचार को आवश्यक बताते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के एमएमटीटीसी में ‘एक्सपेरिमेंटल टेक्नीक्स एंड डेटा एनालिसिस इन फिजिक्स’ विषयक छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) के तत्वावधान में ‘एक्सपेरिमेंटल टेक्नीक्स एंड डेटा एनालिसिस इन फिजिक्स’ विषयक छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार सटीक प्रयोग, विश्वसनीय डेटा विश्लेषण और नवाचार है। उन्होंने कहा कि आज शोध की दिशा ‘एक्सप्लोर, एक्सपेरिमेंट, एनालाइज़ एंड इनोवेट’ (खोजें, प्रयोग करें, विश्लेषण करें और नवाचार करें) के मूल मंत्र से संचालित हो रही है। उन्होंने प्रतिभागियों से आधुनिक प्रयोगात्मक तकनीकों एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर शोध की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय की कुलपति एवं यूजीसी-एमएमटीटीसी की संरक्षक प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अनुसंधान, नवाचार और बहुविषयक शिक्षा को विशेष महत्व देती है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों एवं शोधार्थियों को नवीन वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ते हुए उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज का युग डेटा आधारित ज्ञान का युग है। प्रयोग, विश्लेषण और साक्ष्य-आधारित चिंतन केवल विज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक ज्ञान-विषय की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान कौशल और विश्लेषणात्मक क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मुख्य अतिथि प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल के शैक्षणिक योगदान एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व की भी सराहना की।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव ने छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विभिन्न तकनीकी सत्रों, प्रयोगात्मक प्रशिक्षण और शोधोन्मुख गतिविधियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 70 से अधिक शिक्षक एवं शोधार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। अंत में प्रो. राकेश तिवारी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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