यूपी में निवेश को नई रफ्तार: औद्योगिक प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस-2026 का मसौदा तैयार
यूपी में निवेश को नई रफ्तार: औद्योगिक प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस-2026 का मसौदा तैयार
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश को आधुनिक एवं निवेशक-अनुकूल औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता 'नन्दी' ने इन्वेस्ट यूपी में औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए प्रस्तावित मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस-2026 के मसौदे की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि इन नियमों का उद्देश्य प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए एक समान नियामकीय ढांचा तैयार करना, विकास मानकों को सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाना तथा औद्योगिकीकरण की गति को तेज करना है। साथ ही भूमि के अधिकतम उपयोग के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और राज्य की नियोजन व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि मसौदा तैयार करने से पहले अग्रणी राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
हितधारकों से कई दौर की चर्चा और सार्वजनिक परामर्श में मिले 2,200 से अधिक सुझावों को शामिल कर मसौदे को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है।
प्रस्तावित प्रमुख प्रावधान:
वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा
सीमित भूमि का बेहतर उपयोग
सेटबैक मानकों का युक्तिकरण
अधिक एफएआर (FAR) की सुविधा
भूमि के मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज़) को प्रोत्साहन
छोटे विकास कार्यों के लिए डीम्ड अप्रूवल और सेल्फ-सर्टिफिकेशन डिफिकल्टी रिमूवल कमेटी का गठन
सरल पार्किंग प्रावधान और आधुनिक नियोजन मानक
इन सुधारों में औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय, संस्थागत, लॉजिस्टिक्स, आईटी/आईटीईएस और डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए आधुनिक मानक शामिल हैं। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा, नियामकीय जटिलताएं कम होंगी और प्रदेश में निवेश की नई संभावनाएं बनेंगी। मंत्री नन्दी ने कहा कि मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस निवेशकों को सरल और पारदर्शी अनुभव दें तथा सभी प्राधिकरणों में समान रूप से लागू हों।
उन्होंने भूमि के बेहतर उपयोग के लिए अधिक एफएआर और वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करने पर बल दिया, लेकिन साथ ही सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता न करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को कहा कि नियमों का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता से हो और किसी निवेशक को अनावश्यक परेशानी न हो।
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