योगी की गोसंरक्षण नीति बनी रोजगार का आधार, पंचगव्य उत्पादों से युवा कर रहे करोड़ों का कारोबार
योगी की गोसंरक्षण नीति बनी रोजगार का आधार, पंचगव्य उत्पादों से युवा कर रहे करोड़ों का कारोबार
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोसंरक्षण नीति अब केवल देशी नस्लों के संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का मजबूत आधार भी बनती जा रही है।
प्रदेश में पंचगव्य आधारित आयुर्वेदिक उत्पादों के जरिए युवा उद्यमी करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं। प्रदेश में देसी गायों के संरक्षण के साथ आयुर्वेदिक फार्मेसी भी संचालित की जा रही हैं। अब परंपरागत भारतीय चिकित्सा पद्धति और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय करते हुए आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
एनवायरमेंट इंजीनियर ने अपनाया प्राकृतिक चिकित्सा का रास्ता
बुलंदशहर के एनवायरमेंट इंजीनियर पराग गौड़ ने प्राकृतिक उपचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचगव्य आधारित 40 से अधिक आयुर्वेदिक उत्पाद विकसित किए हैं।
इनमें मोटापे के लिए गोमूत्र अर्क, लिवर और किडनी के लिए पुनर्नवादि अर्क, थायरॉइड के लिए कचनारादि अर्क, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए देसी गाय के घी से तैयार च्यवनप्राश, श्वसन संबंधी समस्याओं और कैंसर में उपयोगी गोमूत्र कैप्सूल, महिलाओं के लिए फल घृत, बच्चों के विकास के लिए अश्वगंधा घृत, शतावरी घृत, आंखों के लिए त्रिफला घृत और पेट रोगों के लिए तक्रारिष्ट प्रमुख हैं।
इन उत्पादों के माध्यम से स्वदेशी चिकित्सा को नई पहचान मिल रही है। पराग गौड़ का सालाना कारोबार अब सवा करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है।
साहीवाल और थारपारकर
नस्लों के संरक्षण का मॉडल_ वर्ष 2017 से प्रदेश में साहीवाल और थारपारकर जैसी देसी नस्लों के गाय संरक्षण का अभियान चल रहा है। गोआधारित उत्पादों के निर्माण ने गोपालन को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाया है। इससे युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
बैल-कोल्हू परियोजना भी संचालित
गोसदन में बैल-कोल्हू तेल परियोजना भी चलाई जा रही है। बैलों को कोल्हू चलाने के योग्य बनाया गया है। इस पारंपरिक विधि से निकाला गया शुद्ध तेल 550 से 650 रुपये प्रति लीटर तक उपलब्ध है। कोल्हू से प्राप्त खल का प्रयोग गायों के चारे में होने से उनके दूध उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।
सरकारी योजना से मिला विस्तार
पराग गौड़ को वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम PMEGP के तहत 10 लाख रुपये का ऋण मिला। इससे नए कक्षों का निर्माण, आधुनिक मशीनों की स्थापना और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोसंरक्षण को वैज्ञानिक सोच और उद्यमिता से जोड़कर इसे ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत का प्रभावी आर्थिक मॉडल बनाया जा सकता है। पंचगव्य औषधियों और पारंपरिक बैल-कोल्हू जैसी पहल ने गोपालन को नई पहचान दी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।
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