गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. विस्मिता पालीवाल को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सम्मान, थाईलैंड में मिला प्रतिष्ठित अवॉर्ड
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर प्रो. विस्मिता पालीवाल को थाईलैंड के फुकेट में आयोजित भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी के 11वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘डॉ. ललित कुमार वाया बिहेवियरल हेल्थ साइंटिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्वास्थ्य मनोविज्ञान में उनके नवाचारी शोध और अकादमी के विकास में योगदान के लिए दिया गया।
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. विस्मिता पालीवाल को थाईलैंड में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मिला ‘डॉ. ललित कुमार वाया बिहेवियरल हेल्थ साइंटिस्ट अवॉर्ड’
गोरखपुर।दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर प्रो. विस्मिता पालीवाल को स्वास्थ्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनके नवाचारी कार्यों तथा भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी (IAHP) के विकास एवं संवर्धन में उनके समर्पित योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘डॉ. ललित कुमार वाया बिहेवियरल हेल्थ साइंटिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान 26 से 28 अक्टूबर, 2026 तक थावोर्न पाम बीच रिसॉर्ट, करोन बीच, फुकेट (थाईलैंड)में आयोजित भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी के 11वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (11th ICIAHP-2026)के दौरान प्रदान किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन एकेडमी ऑफ हेल्थ साइकोलॉजी द्वारा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी के सहयोग से किया गया था।
सम्मान समारोह सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान 26 अक्टूबर को आयोजित हुआ। प्रो. विस्मिता पालीवाल को यह पुरस्कार स्वास्थ्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनके अभिनव अकादमिक एवं शोध कार्यों और इस विषय के प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
इस वर्ष सम्मेलन की मुख्य विषयवस्तु (Focal Theme) ‘Families in Transition: Psychological Pathways Across Cultures’रही, जिसमें विभिन्न देशों के मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य और मनोविज्ञान से जुड़े समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श किया।
उल्लेखनीय है कि प्रो. पालीवाल का शोध कार्य व्यवहारात्मक स्वास्थ्य के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर आधारित है, जिसमें गठिया, अस्थमा, तपेदिक (टीबी), मधुमेह जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों एवं संवेदनशील समुदायों का अध्ययन शामिल है। उनके शोध में मनोवैज्ञानिक कल्याण, चिंता, अवसाद, जीवन की गुणवत्ता, अकेलापन, नींद, भावनात्मक स्वास्थ्य, औषधि अनुपालन तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों के मनोवैज्ञानिक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने बांझपन, घरेलू हिंसा, कोविड-19, मिर्गी, स्ट्रोक एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के मनोवैज्ञानिक प्रभावों का भी गहन अध्ययन किया है। विशेष रूप से, उन्होंने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा वित्तपोषित 'विकसित भारत@2047' की परिकल्पना के अंतर्गत माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में अध्ययनरत युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वच्छता एवं पोषण संबंधी साक्षरता विषय पर एक शोध परियोजना पूर्ण की है, जो युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता और निवारक स्वास्थ्य व्यवहार को प्रोत्साहित करने की दिशा में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
विश्वविद्यालय परिवार ने प्रो. विस्मिता पालीवाल को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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