श्री काशी विश्वनाथ धाम में जुटे देश-विदेश के 50 चित्रकार
अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का भव्य शुभारंभ पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री श्याम शर्मा एवं पद्मश्री अद्वैत गणनायक की गरिमामयी उपस्थिति में स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती, गोविन्द शर्मा एवं सुनील विश्वकर्मा ने किया उद्घाटन
विशेष संवाददाता
वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति की प्राचीन नगरी काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर स्थित ललिता घाट पर शनिवार को अंतरराष्ट्रीय चित्रकला एवं छायाचित्र कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। गंगा महासभा एवं ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के साथ मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश से आए लगभग 50 चित्रकार प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यशाला का उद्घाटन अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा एवं उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा ने किया। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित प्रख्यात कलाकार श्रीमती दुलारी देवी, श्री श्याम शर्मा एवं श्री अद्वैत गणनायक की विशेष गरिमामयी उपस्थिति रही। देश-विदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों की सहभागिता ने इस आयोजन को विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
श्री काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर के निर्माण के बाद पहली बार इस परिसर में इतने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकारों की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। यह आयोजन काशी की धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करने तथा देश-विदेश के कलाकारों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यशाला का विषय “राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर संरक्षण एवं संवर्धन” रखा गया है। इसमें शामिल कलाकार उत्तर प्रदेश के तीर्थों, मंदिरों, धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और भारतीय संस्कृति के विविध स्वरूपों को अपनी कल्पनाशीलता एवं कलात्मक दृष्टि से कैनवास पर उकेरेंगे।
इस आयोजन का विशेष उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों एवं धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों के विकास और पुनरुत्थान के लिए किए गए कार्यों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करना भी है। काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप, अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, तीर्थस्थलों के पुनर्विकास तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में हुए प्रयासों को कलाकार अपनी कृतियों का विषय बनाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, तीर्थों का विकास केवल भौतिक सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़ी सभ्यता, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। चित्रकला के माध्यम से इन सांस्कृतिक उपलब्धियों और परिवर्तनों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना इस कार्यशाला का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
कार्यशाला में तैयार की गई सभी कलाकृतियों की प्रदर्शनी 3 से 5 नवंबर 2026 तक रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र की सिंजो आवे कला दीर्घा में आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में कला प्रेमियों, विद्वानों और देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों को कलाकारों की रचनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को देखने और समझने का अवसर मिलेगा।
यह अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला 3 से 5 नवंबर तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद 2026 के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला का हिस्सा है। इसके माध्यम से काशी को अंतरराष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने तथा भारतीय कला परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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