भक्ति मंदिर में8,300 ग्रामीणों को मिली सर्दी की किट
सर्दी सेपहलेजगद्गुरु कृपालुपरि षत्नेमनगढ़ मेंलगभग 8,300 ग्रामीणों को गर्म कपड़ेऔर घरेलूसामान बाँटे।
मनगढ़ (प्रतापगढ़), 4 नवंबर।
ठंड बढ़नेके साथ बुधवार को श्री कृपालुधाम के भक्ति मंदिर परि सर मेंआसपास के गाँवों सेआए लगभग 8,300 ग्रामीणों को सर्दी के कपड़ेऔर घरेलूसामान दि या गया। यह आयोजन जगद्गुरु कृपालु परिषत्(जे.के.पी) नेकि या, जि सकी स्थापना सन्1972 मेंजगद्गुरु श्रीकृपालुजी महाराज नेकी थी।
4,000 पुरुषों की कि ट मेंदैनि क पहनावेके कपड़ेऔर ऊनी स्वेटर थे, जबकि 4,300 महि लाओंको साड़ी और ऊनी स्वेटर मि ले। हर कि ट के साथ एक डोलू भी था, जि समेंगाँवों मेंदूध और पानी रखा जाता है। कुल लगभग 29,000 वस्तुएँबाँटी गईं।
आयोजकों के अनुसार, ज़्यादातर लाभार्थी कंुडा तहसील और आसपास के छोटे किसानों और दिहाड़ी मज़दूरों के परिवारों सेथे। पुरुषों और महि लाओंके लिएbअलग काउंटर लगाए गए थे, जहाँस्वयंसेवकों नेपंजीकरण की जाँच के बाद किट सौंपी।
किट लेनेवालों मेंपास के गाँव के कि सान राम खि लावन भी थे। उनका कहना था कि जाड़ेमेंपरि वार का खर्च बढ़ जाता है, क्योंकि खेतों मेंरातेंठंडी होने लगती हैंऔर घर के हर सदस्य के लि ए गर्म कपड़ों का इंतज़ाम करना पड़ता है। उन्होंनेबताया कि मि लेहुए स्वेटर और कपड़ों सेयह मौसम नि कल जाएगा, और डोलूघर मेंरोज़ काम आएगा।
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज का जन्म सन्1922 में मनगढ़ मेंहुआ था। सन्1957 मेंकाशी विद्वत्परिषद नेउन्हेंपाँचवेंमूल जगद्गुरु की उपाधि प्रदान की। यहाँके ग्रामीणों के बीच सेवा कार्य उन्हींके समय मेंशुरू हुए, जो आगेचलकर भक्ति मंदि र परि सर के नि:शुल्क चिकित्सालय और कुंडा में बालिकाओंके नि:शुल्क शिक्षण संस्थानों तक पहुँचे।
सन्2013 मेंउनके लीला संवरण के बाद सेपरि षत्का नेतृत्व उनकी पुत्रियाँ डॉ. श्यामा त्रि पाठी और डॉ. कृष्णा त्रि पाठी अध्यक्ष के रूप मेंकर रही हैं। परि षत् के अनुसार, उसके सामुदायि क कार्यक्रम हर वर्ष मनगढ़, वंृदावन और बरसाना में90 हज़ार सेएक लाख लोगों तक पहुँचतेहैं।
डॉ. श्यामा त्रि पाठी नेकहा, "हर जीव मेंश्रीकृष्ण का वास है, और इसी भाव से यह सेवा की जाती है। सर्दी शुरू होनेसेपहलेहमारा प्रयास था कि इन गाँवों के परिवार ठंड सेबचाव के लि ए तैयार रहें।"
डॉ. कृष्णा त्रि पाठी नेकहा, "यह सेवा श्री महाराज जी के समय मेंशुरू हुई थी और इसेआगेबढ़ाना हमारा दायि त्व है।"
बुधवार का यह वि तरण परि षत्के एक माह के वार्षि क साधना शि वि र के दौरान हुआ, जो कार्ति क पूर्णि मा को संपन्न होगा। शि वि र के बाद वंृदावन और बरसाना मेंवि धवा माताओंऔर साधुओंके लि ए भी ऐसेवि तरण होतेहैं।
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