काशी: संस्कृति पर्व के 52वें विशेषांक का लोकार्पण, 8 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजन
काशी के रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित संस्कृति संसद 2026 के उद्घाटन सत्र में मासिक पत्रिका ‘संस्कृति पर्व’ के 52वें विशेषांक का भव्य लोकार्पण ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने किया। इस अंक के साथ पत्रिका ने अपने प्रकाशन के 8 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह विशेषांक छठवीं संस्कृति संसद पर केंद्रित है।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में संस्कृति संसद विशेषांक का विमोचन, संत समाज ने की सराहना
संस्कृति संसद में संस्कृति पर्व के विशेष अंक का भव्य लोकार्पण
वाराणसी। संस्कृति पर्व के संस्कृति संसद विशेषांक का आज भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ। संस्कृति पर्व के 52वें विशेषांक का प्रकाशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी के साथ संस्कृति पर्व मासिक पत्रिका अपने प्रकाशन के 8 वर्ष पूरे कर रही है। इस बार का यह अंक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि काशी में आयोजित संस्कृति संसद 2026 पर इस अंक को केंद्रित किया गया है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, गंगा महासभा और अखिल भारतीय संत समिति एवं श्रीकाशी विद्वत्परिषद द्वारा आयोजित होने वाली यह छठवीं संस्कृति संसद है। भारत संस्कृति न्यास के उपक्रम के रूप में सनातन संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन और वर्तमान चुनौतियों को संदर्भित इस संस्कृति संसद पर केंद्रित इस विशेष अंक का लोकार्पण रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आज संस्कृति संसद के उद्घाटन सत्र में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने सभी महामण्डलेश्वरों और संतों के बीच किया।
इस अवसर पर इस अंक के अतिथि संपादक और संस्कृति संसद के संयोजक आचार्य गोविंद शर्मा और पथ प्रदर्शक अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद जी सरस्वती ने इस अंक की महत्ता पर प्रकाश डाला। महामण्डेश्वर राधेबाबा ने इसकी भूमिका प्रस्तुत की। संस्कृति पर्व के संपादक आचार्य संजय तिवारी और कार्यकारी संपादक डॉ. अर्चना तिवारी भी उपस्थित रहीं।
विशेषांक के प्रमुख विषय:
इस विशेषांक में प्रमुख रूप से संस्कृति संसद की अब तक की यात्रा और उसके परिणाम, सनातन संस्कृति के समक्ष उपस्थित वर्तमान चुनौतियां, विश्व में शांति और मानवता की रक्षा केवल सनातन से ही संभव, भारत में सनातन की पुनर्स्थापना, सनातन संस्कृति को समाज संचालन के लिए शिक्षा से जोड़ना, सामाजिक विभेद, जातीय संघर्ष और विभाजनकारी षड्यंत्रों से बचने के उपाय, नए भारत के नवनिर्माण के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना, प्राचीन और अर्वाचीन में वर्तमान का सामयिक विश्लेषण, संस्कृति संसद से विश्व के लिए संदेश और संस्कृति, संस्कार व समाज का आधुनिक संदर्भ जैसे विषयों को समाहित किया गया है।
इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य के अलावा विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, माननीय दिनेश जी, अशोक तिवारी, चंपत राय, सुधांशु जी महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी जी, श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री आचार्य रामनारायण द्विवेदी जी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ तथा संस्कृति संसद के आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील देवधर जी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
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