पत्रकारिता में एआई जरूरी, पर तथ्य-जांच से समझौता नहीं : विशाल सिंह

लखनऊ में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित संगोष्ठी में सूचना निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में एआई का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए लेकिन अपुष्ट खबरों से विश्वसनीयता को खतरा है। संगोष्ठी में कॉरपोरेट प्रभाव, भाषा की शुद्धता, फेक न्यूज और खोजपरक पत्रकारिता पर चर्चा हुई।

Oct 24, 2026 - 20:00
Oct 24, 2026 - 20:17
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पत्रकारिता में एआई जरूरी, पर तथ्य-जांच से समझौता नहीं : विशाल सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूचना निदेशक विशाल सिंह

एनयूजे की संगोष्ठी में भाषा की शुद्धता, खोजपरक पत्रकारिता और मीडिया की विश्वसनीयता पर मंथन, विशेषज्ञों ने कहा - गति से अधिक जरूरी है सत्यता

आईटी एक्सपर्ट टीसीएस अजय सिंह

लखनऊ, 24 अक्टूबर।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए, लेकिन अपुष्ट समाचार से पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। सोशल मीडिया और एआई के दौर में खबरों की सत्यता जांचना पत्रकारों की बड़ी जिम्मेदारी है।

वह शनिवार को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश की ओर से सूचना विभाग के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। ‘पत्रकारों में पत्रकारीय समझ’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में मीडिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

विशाल सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक सूचनाएं फैलने और एआई के दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने यूरोपीय देशों में विरोध प्रदर्शनों और लूटपाट की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री लोगों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पत्रकारों को किसी भी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।

टीवी नेटवर्क 10 के संपादक संजय गिरि ने मीडिया पर कॉरपोरेट प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों के बढ़ते प्रभाव से पत्रकारिता की निष्पक्षता और स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। संपादकीय स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए आत्ममंथन की जरूरत है और पत्रकार संगठनों को मीडिया की विश्वसनीयता बचाने के लिए आगे आना होगा।

विशिष्ट अतिथि आईटी विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक पत्रकारिता के कामकाज को तेजी से बदल रही हैं। पत्रकारों को तकनीक के साथ अपनी दक्षता जोड़नी होगी। उन्होंने डेटा विश्लेषण, मेटाडेटा की पड़ताल और फेक न्यूज की पहचान पर जोर देते हुए कहा कि खबर की गति से अधिक महत्वपूर्ण उसकी सत्यता है। पत्रकारों को डिटेक्टिव की तरह स्रोत और तथ्यों की जांच करनी चाहिए।

आमंत्रित अतिथि अंबरीष श्रीवास्तव ने एआई को इंजन की संज्ञा देते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल लाभकारी भी हो सकता है और नुकसानदेह भी। डिजिटल दौर में कंटेंट तैयार करने के साथ उसकी सत्यता परखना भी जरूरी है और एआई का उपयोग ज्ञान-विवेक के साथ होना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार प्रभात रंजन दीन ने हिंदी पत्रकारिता में भाषा और वर्तनी की गलतियों पर चिंता जताई। ‘पूंछ’ और ‘पूछ’ तथा ‘विनम्र श्रद्धांजलि’ जैसे प्रयोगों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि छोटी सी गलती भी अर्थ बदल देती है, इसलिए शब्दों के सही अर्थ और प्रयोग के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि खबरों की तह तक पहुंचने और खोजपरक पत्रकारिता की परंपरा को फिर मजबूत करने की जरूरत है।

संगोष्ठी में एनयूजे उत्तर प्रदेश के संयोजक प्रमोद गोस्वामी, संरक्षक वीरेंद्र सक्सेना, प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दुबे, महामंत्री बिजेंद्र शर्मा और कोषाध्यक्ष अरुण अवस्थी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

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Keshav Shukla साहित्यकार, उद्घोषक, पत्रकार