भाजपा के ‘यूपी अष्टक’ में हरीश द्विवेदी की बढ़ती भूमिका, राष्ट्रीय संगठन में बढ़ा कद

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ नेताओं को प्रभारी और सह प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्यों का प्रभारी बनाए जाने से उनकी संगठनात्मक भूमिका और राष्ट्रीय कद को लेकर चर्चा तेज है। छात्र राजनीति से भाजपा संगठन में पहुंचे द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभार भी मिला है।

Sep 23, 2026 - 22:09
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भाजपा के ‘यूपी अष्टक’ में हरीश द्विवेदी की बढ़ती भूमिका, राष्ट्रीय संगठन में बढ़ा कद

आचार्य संजय तिवारी 

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ नेताओं को महत्वपूर्ण राज्यों का प्रभारी और सह प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर यूपी के नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस तथाकथित ‘यूपी अष्टक’ में राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्यों का प्रभारी बनाए जाने से उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारी खास तौर पर बढ़ी है।

आचार्य संजय तिवारी के विश्लेषण के अनुसार, भाजपा संगठन में हरीश द्विवेदी की भूमिका अब एक सामान्य सांसद की राजनीतिक पहचान से आगे बढ़कर संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण हो गई है। अगस्त 2026 में राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया और अब बिहार तथा कर्नाटक की जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में महामंत्री का पद राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में लगातार मिल रही जिम्मेदारियों को द्विवेदी के संगठनात्मक कद में वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा ने उत्तर प्रदेश के आठ नेताओं को विभिन्न राज्यों में प्रभारी और सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी है। हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया है। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी, श्रीकांत शर्मा को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी तथा दर्शना सिंह को सह प्रभारी बनाया गया है। संगीता यादव को बिहार का सह प्रभारी, डॉ. भोला सिंह को हरियाणा का सह प्रभारी, रेखा वर्मा को मध्य प्रदेश के साथ तेलंगाना का सह प्रभारी और डॉ. स्वदेश सिंह को ओडिशा का सह प्रभारी बनाया गया है।

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक

बस्ती निवासी हरीश द्विवेदी वर्ष 2004 से भाजपा की सक्रिय राजनीति में हैं और छात्र राजनीति से संगठन में आए। वर्ष 2012 में उन्होंने बस्ती सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2014 में वे बस्ती लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए और 2019 में दोबारा जीत दर्ज की। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद भी संगठन में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती रहीं।

द्विवेदी इससे पहले असम के प्रभारी भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान 2026 में असम में भाजपा की सरकार दोबारा बनने के बाद उन्हें राजस्थान के निकाय चुनाव और फिर बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी दी गई। पार्टी के भीतर उनके समर्थक उनकी संगठनात्मक क्षमता, चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से संपर्क को उनकी प्रमुख ताकत बताते हैं।

लेख के अनुसार, कलराज मिश्र और शिवप्रताप शुक्ल के बाद हरीश द्विवेदी को उत्तर प्रदेश के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में गिना जा रहा है। साथ ही अपेक्षाकृत युवा होने के कारण 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा है।

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को स्थान मिला है, जिनमें दो राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी हैं। लगातार बढ़ती संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बीच द्विवेदी की भूमिका अब उत्तर प्रदेश की राजनीति से आगे राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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Keshav Shukla साहित्यकार, उद्घोषक, पत्रकार