योगी सरकार का बड़ा एक्शन: ₹4000 करोड़ के नोएडा लीजबैक घोटाले में 1997 बैच के सीनियर PCS हरीश चंद्र बर्खास्त
उत्तर प्रदेश सरकार ने ₹4000 करोड़ के नोएडा लीजबैक घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 1997 बैच के सीनियर PCS अधिकारी हरीश चंद्र को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सबसे बड़ी कार्रवाई की है। 1997 बैच के सीनियर PCS अधिकारी हरीश चंद्र को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव IAS एम. देवराज ने सोमवार 29 सितंबर को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है।
कोलकाता में थे तैनात
बर्खास्तगी के समय हरीश चंद्र कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। वह यूपी के सबसे सीनियर PCS अफसरों में गिने जाते थे।
क्या है 4000 करोड़ का घोटाला?
मामला 2011 का है जब हरीश चंद्र नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने ग्राम शहदरा के सेक्टर 140-A, 141, 142 और 143 की 3,81,527 वर्ग मीटर अर्जित जमीन को नियमों के खिलाफ लीजबैक कर दिया।
नियम के अनुसार लीजबैक सिर्फ स्थानीय पात्र किसानों को मिलना था, जिसमें प्रति परिवार 450 वर्ग मीटर की सीमा थी। लेकिन जांच में सामने आया कि बाहरी लोगों और निजी कंपनियों को 15,000 वर्ग मीटर से बड़े-बड़े प्लॉट दे दिए गए। इनकी बाजार कीमत ₹3800 से ₹4000 करोड़ आंकी गई थी।
सैटेलाइट इमेज तक छुपाई
ताज़ा जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है - आबादी निर्धारण के लिए सैटेलाइट इमेज का उपयोग जानबूझकर नहीं किया गया ताकि तथ्य छुपाए जा सकें। सर्वे रिपोर्ट में कई प्राइवेट कंपनियों और बाहर के लोगों को शामिल किया गया। कॉलम-9 में मूल काश्तकार का नाम तक नहीं लिखा गया।
13 साल बाद कार्रवाई पूरी
इस घोटाले में 27 सितंबर 2013 को ही अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति हुई थी। इसकी जांच नोएडा की तत्कालीन CEO IAS रितु माहेश्वरी ने की थी।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से 6 जनवरी 2022 को मंजूरी मिली और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश के बाद अब बर्खास्तगी हुई है।
इसी जांच के कारण हरीश चंद्र का IAS में प्रमोशन सालों से रुका हुआ था। 2018 में मुजफ्फरनगर में ADM रहते हुए भी वह एक विवाद के बाद सस्पेंड हो चुके हैं।
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