अमृतवाणी

May 26, 2024 - 20:45
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अमृतवाणी

अद्भिर्गात्राणि शुद्ध्यन्ति

मन:सत्येन शुद्ध्यति।

विद्यातपोभ्यां भूतात्मा

बुद्धिर्ज्ञानेन शुद्ध्यति।।

 (मनुस्मृति -०५/१०९)

अर्थात - जल से शरीर शुद्ध होता है,सत्य से मन शुद्ध होता है,विद्या और तप से मनुष्य की आत्मा शुद्ध होती है तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है।

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KeshavShukla विभिन्न राष्ट्रीय साहित्यिक-सांस्कृतिक मंचों पर साहित्य विमर्श, कविता, कहानी लेखन ,स्क्रिप्ट लेखन, नाटकों का मंचन, रेडियो स्क्रिप्ट लेखन, उद्घोषणा कार्य एवं पुस्तक समीक्षा।