करोड़ों ब्रह्मांडों का संचालन जहां से होता है, वह है मणिद्वीप: आचार्य संजय तिवारी

आचार्य संजय तिवारी ने महाशक्ति के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां भगवती का परमधाम मणिद्वीप है, जहां से करोड़ों ब्रह्मांडों का नियंत्रण होता है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के द्वादश स्कंध में मणिद्वीप का दिव्य वर्णन है, जो अमृत सागर से घिरा है और सभी लोकों से परे सर्वोच्च स्थान पर स्थित है।

Oct 19, 2026 - 20:43
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करोड़ों ब्रह्मांडों का संचालन जहां से होता है, वह है मणिद्वीप: आचार्य संजय तिवारी

महाशक्ति का परमधाम है मणिद्वीप, वैकुंठ-कैलाश और गोलोक से भी श्रेष्ठ

प्रयागराज।

मां कहां रहती हैं? मां कैसी हैं? वही महाशक्ति क्यों हैं? करोड़ों ब्रह्मांडों का नियंत्रण कैसे करती हैं? ऐसे गूढ़ प्रश्नों का उत्तर देते हुए आचार्य संजय तिवारी ने महाशक्ति के परमधाम मणिद्वीप के रहस्यों पर प्रकाश डाला।

आचार्य तिवारी ने कहा कि जिन्हें जगत पिछले 9 दिनों से दुर्गा-दुर्ग विनाशिनी के रूप में पूज रहा है, उनके धाम का रहस्य आधुनिक विज्ञान नहीं, केवल सत्य सनातन ग्रंथ ही बता सकते हैं।

श्रीमद्देवीभागवत पुराण में मणिद्वीप का वर्णन -

द्वादश स्कंध में भगवती आदिशक्ति के परम धाम 'मणिद्वीप' का अत्यंत दिव्य और विस्तृत वर्णन है। इसकी विशेषताएं हैं:

सर्वोच्च स्थान: यह दिव्य लोक कैलाश, वैकुंठ और गोलोक से भी श्रेष्ठ, परम और अलौकिक माना गया है। चारों ओर से अमृत के समुद्र से घिरा है, जहां विभिन्न मणियों, रत्नों और कल्पवृक्षों की सुंदर वाटिकाएं हैं।

इस द्वीप के भीतर शृंगार मंडप, मुक्ति मंडप और ज्ञान मंडप स्थित हैं। इन मंडपों में दिव्य सिंहासन पर माता भुवनेश्वरी / जगदम्बा भगवती विराजमान रहती हैं, जिनके सानिध्य में चौंसठ कलाएं, विभिन्न देवगण और शक्तियां सदा सेवा में रहती हैं।

ब्रह्मांड की संरचना और मणिद्वीप की स्थिति -

श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के अनुसार सूर्य लोक को ब्रह्मांड का मध्य केंद्रबिंदु माना गया है। वहां से ऊपर की ओर लोकों की दूरी योजन में इस प्रकार है - चन्द्र लोक 1 लाख योजन, नक्षत्र मंडल 3 लाख, बुध 5 लाख, शुक्र 7 लाख, मंगल 9 लाख, बृहस्पति 11 लाख, शनि 13 लाख, सप्तर्षि मंडल 24 लाख और ध्रुव लोक 38 लाख योजन ऊपर।

ध्रुव लोक से आगे महर्लोक 1 करोड़ योजन, जनलोक 2 करोड़ योजन, तपोलोक 8 करोड़ योजन और सत्यलोक (ब्रह्मलोक) 12 करोड़ योजन ऊपर स्थित है। सूर्य लोक से सत्यलोक तक की कुल दूरी लगभग 23 करोड़ 38 लाख योजन है।

आचार्य ने बताया कि देवी पुराण के अनुसार सत्यलोक से भी सर्वोपरि तथा वैकुंठ और गोलोक से भी ऊपर परम आकाश में आदिशक्ति का 'मणिद्वीप' स्थित है, जो ब्रह्मांड की अंतिम सीमा और सर्वोच्च शिखर है। इसीलिए सभी देवता मां के समक्ष नतमस्तक रहते हैं और श्री हरि विष्णु स्वरूप श्री राम को भी शक्ति पूजा करनी पड़ती है।

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Keshav Shukla साहित्यकार, उद्घोषक, पत्रकार