यूपी कांग्रेस में बड़ा धमाका! अजय राय की छुट्टी तय, ब्राह्मण महिला चेहरे आराधना मिश्रा 'मोना' को मिल सकती है कमान
यूपी कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत, अजय राय की जगह आराधना मिश्रा मोना बन सकती हैं नई प्रदेश अध्यक्ष, ब्राह्मण महिला चेहरे पर दांव।
लखनऊ(हिन्द भास्कर):- विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बड़े स्तर पर बदलाव की आहट तेज हो गई है। दिल्ली में बैठे आलाकमान ने मौजूदा संगठन पर मंथन शुरू कर दिया है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को नई भूमिका में दिल्ली बुलाया जा सकता है और उनकी जगह पर नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है।
इस दौड़ में सबसे मजबूत नाम रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा उर्फ मोना का सामने आ रहा है। वह प्रतापगढ़ की उस सीट से आती हैं जो कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती है। 2014 के उपचुनाव से लेकर 2022 के कठिन चुनाव तक, जब कांग्रेस पूरे यूपी में सिर्फ दो सीट जीत पाई थी, तब भी मोना ने अपनी सीट पर जीत का परचम लहराया था। पार्टी के भीतर चर्चा है कि कांग्रेस इस बार एक तीर से दो निशाने साधना चाहती है।
पहला - महिला नेतृत्व और दूसरा - ब्राह्मण समाज में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना। आराधना मिश्रा कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी की सुपुत्री हैं और फिलहाल विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेतृत्व कर रही हैं। वहीं अजय राय, जो अगस्त 2023 से प्रदेश की कमान संभाले हुए हैं और वाराणसी से दो बार प्रधानमंत्री के सामने चुनाव लड़ चुके हैं, उनकी छवि एक आक्रामक नेता की रही है।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई अहम जिम्मेदारी दे सकती है। साथ ही यूपी में 3 से 4 कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की भी योजना है ताकि हर वर्ग को साधा जा सके। फिलहाल कांग्रेस की तरफ से इस बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक पत्र जारी नहीं हुआ है। फैसला अंतिम रूप से कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है।
हिन्द भास्कर का विश्लेषण - खबर पहले क्यों उड़ी?
पिछले 48 घंटों में सोशल मीडिया पर कई जगह अजय राय को हटाने की चर्चा चली है, लेकिन किसी के पास संगठन के अंदर की पुख्ता जानकारी नहीं थी। हिन्द भास्कर को जो जानकारी मिली है उसके अनुसार, कांग्रेस आलाकमान 2027 से पहले सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि पूरा सोशल इंजीनियरिंग समीकरण बदलना चाहता है।
आराधना मिश्रा 'मोना' का नाम इसलिए सबसे आगे है क्योंकि वह इकलौती ऐसी विधायक हैं जो 2014, 2017 और 2022 - तीनों कठिन चुनावों में कांग्रेस के गढ़ रामपुर खास को बचा पाई हैं। साथ ही वह वर्तमान में विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता भी हैं, जिससे उनका प्रशासनिक अनुभव भी मजबूत है। अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को लेना है।
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