आश्विन कृष्ण अष्टमी — शनिवार, ३ अक्टूबर २०२६ ईसवी को जीवित्पुत्रिका “ जितिया “ व्रत होगा ।
॥ श्रीजीवित्पुत्रिका “जितिया “ व्रत-निर्णय ॥
- आचार्य धीरेन्द्र मनीषी
आश्विन कृष्ण अष्टमी — शनिवार, ३ अक्टूबर २०२६ ईसवी को जीवित्पुत्रिका “ जितिया “ व्रत होगा ।
१. व्रत का शास्त्रीय आधार
जीवित्पुत्रिका अथवा जीमूतवाहन-व्रत के विषय में प्राचीन निबन्ध-परम्परा में यह स्पष्ट निर्णय मिलता है—
आश्विनकृष्णाष्टमी जीमूतवाहनव्रते प्रदोषव्यापिनी ग्राह्या।
उभयदिने प्रदोषव्याप्तौ परैव।
उभयदिने प्रदोषाव्याप्तौ उदयगामिनी।
… नवम्यां पारणेति सिद्धान्तः॥
अर्थात्—
आश्विन कृष्णपक्ष की अष्टमी में किया जाने वाला श्रीजीमूतवाहन-जीवित्पुत्रिका-व्रत प्रदोषव्यापिनी अष्टमी में करना शास्त्रसम्मत है।
“पूर्वेद्युरपरेद्युर्वा प्रदोषे यत्र चाष्टमी।
तत्र पूज्यः सदा स्त्रीभिः राजा जीमूतवाहनः॥”
तथा निबन्धकार का सिद्धान्त है—
“आश्विनकृष्णाष्टमी जीमूतवाहनव्रते प्रदोषव्यापिनी ग्राह्या…”
वर्ष २०२६ में शनिवार, ३ अक्टूबर को आश्विन कृष्ण अष्टमी प्रदोषकाल में विद्यमान है,अतः जीवित्पुत्रिका-व्रत तथा प्रदोषकालीन श्रीजीमूतवाहन-पूजन ३ अक्टूबर २०२६, शनिवार को ही करना चाहिए ।
रविवार, ४ अक्टूबर को अष्टमी समाप्त होने के पश्चात् नवमी में पारण करना चाहिए।
इति शास्त्रीय निर्णयः।
१. तीन दिनों का व्यावहारिक क्रम
शुक्रवार — २ अक्टूबर शुक्रवार सप्तमी
के दिन संध्या/रात्रि जिसे संझत कहते हैं उस समय ओठगन ओठगाँवल,पुआ पकवान का भोग लगाकर भोजन क्षेत्रीय परम्परा के अनुसार किया जाता है।
यह मुख्य शास्त्रीय व्रत-दिन नहीं, बल्कि स्थानीय परम्परा का अंग है।
शनिवार — ३ अक्टूबर
मुख्य जीवित्पुत्रिका-व्रत।
प्रातः स्नान-संकल्प।
२४ घंटे का उपवास।
परम्परा के अनुसार निर्जल व्रत।
सायंकाल/प्रदोष में राजा जीमूतवाहन का पूजन।
जीवित्पुत्रिका-व्रत कथा का श्रवण।
रात्रि में व्रत जारी रहेगा।
श्रीकाशीविश्वनाथ पञ्चाङ्गम्
श्रीहृषीकेश पञ्चाङ्ग श्री सम्वत् २०८३
ईसवी सन्
२०२६ /२७ के प्रकाशित विवरण में भी ३ अक्टूबर को
जीवित्पुत्रिका व्रत,संध्याकालीन जीमूतवाहन-पूजन का उल्लेख है।
३.रविवार — ४ अक्टूबर को प्रातःकाल ७ बजकर २८ मिनट के बाद व्रत का पारण नवमी तिथि में करना चाहिए।
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